20 अगस्त 2025 की सुबह। जब लोग पुणे और मुंबई के बीच बसे कर्जत कस्बे में मॉर्निंग वॉक पर निकल रहे थे या चाय की चुस्कियाँ ले रहे थे, तभी मार्केट रेगुलेटर सेबी (SEBI) की टीम एक बड़े एक्शन की तैयारी में जुटी थी। लक्ष्य था—अवदूत साठे ट्रेडिंग अकादमी (ASTA), जहां हजारों लोग शेयर मार्केट की ‘गुरुकुल शैली’ में ट्रेनिंग लेने आते थे। लेकिन इस बार मामला सिर्फ सीखाने तक सीमित नहीं था।
सेबी ने इस अकादमी पर छापा मारा, दस्तावेज़ जब्त किए, डिजिटल उपकरणों को कब्जे में लिया और पूरा दिन कागज़-पत्रों की जांच में बीता। वजह साफ़ थी—बिना रजिस्ट्रेशन गारंटीड रिटर्न और लाइव ट्रेडिंग डेटा का इस्तेमाल, जो सेबी के नियमों का सीधा उल्लंघन है।
अवदूत साठे का नाम ट्रेडिंग की दुनिया में नया नहीं है। मुंबई के दादर की चॉल में पले-बढ़े साठे ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और IT कंपनी Hexaware Technologies में काम किया। इसके बाद सिंगापुर, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका में नौकरी की। सिलिकॉन वैली तक का अनुभव उन्हें हासिल हुआ।
एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि अमेरिका जाने का असली सपना सिर्फ नियाग्रा फॉल्स पर माता-पिता के साथ फोटो खिंचवाना था। लेकिन भारत लौटने के बाद उनका रुख शेयर मार्केट की ओर मुड़ गया। शुरुआती निवेश में उन्हें भारी नुकसान झेलना पड़ा। तभी उन्हें अहसास हुआ कि—“मार्केट सिर्फ टेक्निकल एनालिसिस का खेल नहीं है, यह मनोविज्ञान का खेल भी है।”
2007 में उन्होंने ठान लिया कि वे न सिर्फ खुद ट्रेडिंग करेंगे बल्कि दूसरों को भी इसके बारे में सिखाएंगे।
2008 में पुणे के एक छोटे से बैंक्वेट हॉल से अवदूत साठे ने अपनी ‘ट्रेडिंग क्लासेस’ की शुरुआत की। उस समय महज़ 12 लोग मौजूद थे—जिनमें उनके पूर्व बॉस और कुछ पुराने सहकर्मी भी शामिल थे।
यहीं से अवदूत साठे ट्रेडिंग अकादमी (ASTA) की नींव पड़ी। धीरे-धीरे उनका प्रशिक्षण कार्यक्रम बढ़ता गया और हजारों लोगों तक पहुँच गया।
आज इस अकादमी के दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, कोलकाता, चंडीगढ़, हैदराबाद, चेन्नई, अहमदाबाद, इंदौर, नागपुर और नासिक सहित प्रमुख भारतीय शहरों में सेंटर हैं। सिर्फ इतना ही नहीं, विदेशों में भी 200 से ज्यादा सेंटर्स और हजारों स्टूडेंट्स इससे जुड़े हुए हैं।
ASTA खुद को ‘गुरुकुल’ की तरह पेश करती थी। यहाँ रहने-सहने के साथ ही ट्रेडिंग सीखने का दावा किया जाता था।
यानी लोग कमाने से पहले ही मोटी फीस में निवेश कर देते थे।
साठे की ट्रेनिंग शैली भी अनोखी थी। वे लाइव सेशन लेते थे, बड़ी स्क्रीन पर चार्ट दिखाते, बीच-बीच में डांस तक कर डालते और अपने छात्रों को पूरी तरह इनवॉल्व करने की कोशिश करते। इसी अंदाज़ ने उन्हें लोकप्रिय बना दिया। उनका YouTube चैनल करीब 10 लाख सब्सक्राइबर्स तक पहुंच चुका है।
अब सवाल उठता है कि यदि सब कुछ इतना शानदार चल रहा था तो SEBI की कार्रवाई क्यों हुई?
नियम साफ हैं—
अवदूत साठे पर आरोप है कि वे ठीक यही कर रहे थे। कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि कई ट्रेडिंग अकादमी किसी खास स्टॉक को प्रमोट करने के लिए लाइव चार्ट्स का उदाहरण देती हैं, जिससे उन शेयरों की कीमत कृत्रिम रूप से बढ़ सकती है।
साठे महीनों से सेबी की निगरानी में थे और 20 अगस्त का छापा उसी कार्रवाई का हिस्सा था।
फिनफ्लुएंसर्स (Finance + Influencers) के खिलाफ सेबी की सख्ती नई नहीं है।
2023 में भी PR Sundar, एक मशहूर फिनफ्लुएंसर, पर नियम तोड़ने का आरोप लगा था। सेबी का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि निवेशकों को भ्रमित कर कोई भी गारंटीड मुनाफे के झांसे में न डाले।
मार्केट जानकारों के मुताबिक, असली परेशानी यह है कि लोग सोशल मीडिया और ट्रेनिंग सेशन देखकर तुरंत निवेश करने लगते हैं।
एक वरिष्ठ वेल्थ मैनेजर बताते हैं—
“सेबी रजिस्टर्ड फाइनेंशियल एडवाइजर बनने के लिए परीक्षा देनी पड़ती है, अनुभव हासिल करना पड़ता है। जबकि कई फिनफ्लुएंसर सिर्फ तकनीकी विश्लेषण या अपने अनुभव के आधार पर सलाह दे देते हैं। नुकसान होने पर उनकी कोई जिम्मेदारी नहीं बनती, नुकसान सिर्फ निवेशक का होता है।”
अवदूत साठे का मामला निवेशकों के लिए एक चेतावनी है।
अवदूत साठे का सफर चॉल से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर की अकादमी तक पहुँचना अपने आप में प्रेरणादायक था। लेकिन जिस पल उन्होंने नियमों को ताक पर रखकर लोगों को गारंटीड सपने दिखाने शुरू किए, उसी पल उनका पतन भी तय हो गया
© Copyright 2026 by शिवंलेख - Design & Developed By Codes Acharya