प्रतापगढ़: शनिवार को प्रतापगढ़ जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के नेतृत्व में जनपद न्यायाधीश अब्दुल शाहिद ने राष्ट्रीय लोक अदालत का उद्घाटन किया। न्यायिक अधिकारियों के सहयोग से सुलह-समझौता के आधार पर वादों का निस्तारण कराया गया।
न्यायालय परिसर में शनिवार को जनपद न्यायाधीश अब्दुल शाहिद ने मां सरस्वती की प्रतिमा पर दीप प्रज्वलित कर राष्ट्रीय लोक अदालत की शुरुआत की। उन्होंने न्यायिक अधिकारियों को निर्देशित किया कि अधिक से अधिक संख्या में आपसी सुलह-समझौते से मुकदमों का निस्तारण कराया जाए। इस लोक अदालत में कुल 118578 वादों का निस्तारण कराया गया।
इनमें 3637 फौजदारी वाद, 11 एनआई एक्ट, 177 विद्युत वाद, 30 मोटर दुर्घटना वाद, 77 वैवाहिक वाद, 461 सिविल वाद, 968 बैंक ऋण, 11 बीएसएनएल वाद शामिल थे। कलेक्ट्रेट प्रशासनिक अधिकारियों की ओर से 111279 मामले, विद्युत विभाग के 1624 वाद एवं उपभोक्ता फोरम की ओर से 4 वादों का निस्तारण किया गया।
फौजदारी वादों में 1737862 रुपये का अर्थदंड वसूल किया गया। मोटर दुर्घटना क्षतिपूर्ति वादों में मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण के अधिकारी दिवाकर चतुर्वेदी की ओर से 30 मामलों में विपक्षी बीमा कंपनियों से पीड़ित याचिकाओं को 15827000 रुपये का प्रतिकर दिलाया गया। उत्तराधिकार वादों में 2193469 रुपये का उत्तराधिकार प्रमाणपत्र जारी किया गया। बैंकों के बकाया 1277 मामलों में बैंक एवं बकायेदारों के मध्य 120736127 रुपये का समझौता कराया गया। बीएसएनएल वादों में कुल 28484 रुपये का समझौता हुआ।
परिवार न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश की ओर से 77 वैवाहिक मामलों में पति-पत्नी के मध्य सौहार्दपूर्ण समझौता कराया गया। उभय पक्षों को जनपद न्यायालय के सभागार में जनपद न्यायाधीश एवं परिवार न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश की ओर से मिठाई देकर उनके उज्जवल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी गईं।
इस राष्ट्रीय लोक अदालत के सफल आयोजन में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के पराविधिक स्वयंसेवकों, पैनल अधिवक्ताओं, मध्यस्थों, कर्मचारियों एवं बैंक अधिकारियों के सहयोग के लिए नोडल विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव सुमित पंवार ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
जनपद न्यायाधीश अब्दुल शाहिद ने इस अवसर पर कहा कि लोक अदालतें न्यायपालिका और समाज के बीच एक सेतु का काम करती हैं, जिससे त्वरित और सुलभ न्याय सुनिश्चित होता है। उन्होंने सभी संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की सराहना की और उनके सहयोग की प्रशंसा की।
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