पश्चिम बंगाल के न्यू जलपाईगुड़ी स्टेशन के पास सोमवार सुबह 8:45 पर कंचनजंघा एक्सप्रेस एक मालगाड़ी से टकरा गई। कंचनजंघा एक्सप्रेस न्यू जलपाईगुड़ी स्टेशन के पास खड़ी थी, और स्टेशन से करीब 30 किलोमीटर दूर एक मालगाड़ी ने उसे टक्कर मार दी। इस हादसे में 10 लोगों की मौत हो गई और कई लोग घायल हो गए।
जानकारी के अनुसार, इस हादसे की वजह मालगाड़ी के चालक द्वारा सिग्नल की अनदेखी बताई जा रही है। मालगाड़ी ने कंचनजंघा ट्रेन के पिछले हिस्से से टक्कर मारी, जिससे एक्सप्रेस ट्रेन के दो डिब्बे पटरी से उतर गए और कई लोग घायल हो गए। कंचनजंघा एक्सप्रेस की गाड़ी के एसएलआर और जनरल बोगी एक-दूसरे पर चढ़ गईं और बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गईं। यह हादसा न्यू जलपाईगुड़ी स्टेशन से कुछ दूरी पर रंगापानी और निजवाड़ी स्टेशन के बीच हुआ। एक कोच मालगाड़ी के इंजन के ऊपर चढ़ गया।
एनएफआर के मुख्य जन संपर्क अधिकारी सब्यसाची डे के अनुसार, असम के सिलचर से कोलकाता के सियालदह के बीच चलने वाली कंचनजंघा एक्सप्रेस सियालदह जा रही थी। तभी उत्तर बंगाल में न्यू जलपाईगुड़ी के पास स्थित रंगापानी स्टेशन के पास एक मालगाड़ी ने उसे पीछे से टक्कर मार दी। उन्होंने बताया, "करीब 25 लोग घायल हुए हैं और उन्हें नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उन्हें कोई गंभीर चोट नहीं आई है। बचाव अभियान युद्धस्तर पर चल रहा है और हम जल्द से जल्द इसे पूरा करने की कोशिश कर रहे हैं। वरिष्ठ अधिकारी पहले ही घटना स्थल पर पहुंच चुके हैं। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, कंचनजंघा को पीछे से एक मालगाड़ी ने टक्कर मारी जिससे हमें आठ लोगों की मौत की सूचना मिली है।"
खराब सिग्नल और ड्राइवर की चूक से हादसा
इस हादसे में खराब सिग्नल और मालगाड़ी के ड्राइवर की चूक को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। खबरों के मुताबिक, रूट पर ऑटोमेटिक सिग्नल काम नहीं कर रहा था और ट्रेनों को चलाने के लिए मैन्युअल सिग्नल का इस्तेमाल हो रहा था। जब ऑटोमेटिक सिग्नल काम नहीं कर रहा होता तब स्टेशन मास्टर एक आदेश जिसे टी ए 912 कहते हैं, ड्राइवर को सभी ऑटोमेटिक रेड सिग्नल पार करने की अनुमति देता है। कंचनजंघा एक्सप्रेस और मालगाड़ी दोनों को टी ए 912 यह सिग्नल जारी किया गया था, जिसकी वजह से यह बड़ा रेल हादसा हुआ।
इस भीषण रेल हादसे में कई यात्रियों की जान चली गई और कई लोग घायल हो गए। सुबह से ही सिलीगुड़ी में हो रही भारी बारिश के कारण फंसे हुए यात्रियों को बाहर निकालने का बचाव कार्य चल रहा है। रिलीफ ट्रेन को भी मौके पर भेजा गया है। हादसे के बाद एनडीआरएफ, डिविजनल टीम और 15 एम्बुलेंस मौके पर पहुंच चुकी हैं। मंत्री भी वार्ड रूम में हैं। हादसे के बाद ट्रेन की बोगियाँ कनस्तर की तरह पिचक गई हैं और चारों तरफ सामान बिखरा पड़ा है। ट्रेन के डिब्बे का कागज के पन्ने की तरह चिथड़े उड़ गए हैं। ऐसे में डिब्बे के अंदर बैठे यात्रियों का क्या हाल हुआ होगा, यह मंजर कितना खतरनाक रहा होगा, इसे सोचकर ही रूह कांप उठती है।
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