प्रयागराज - भारत भाग्य विधाता के तत्वावधान में 1857 की क्रांति के शहीदों को नमन करने के लिए एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर असिस्टेंट कमिश्नर जीएसटी जितेंद्र कुमार ने कहा, "अपने पूर्वजों के गौरवशाली इतिहास को संजोना हमारी जिम्मेदारी है। आज वह समय है जब हम 1857 के क्रांतिकारी शहीदों की गौरव गाथा को जन-जन तक पहुंचाएं जिससे राष्ट्र प्रेम की भावना जागृत हो।"
शहीद वॉल पर आयोजित "एक दीप शहीदों के नाम" कार्यक्रम में बोलते हुए जितेंद्र कुमार ने कहा कि शहीद वॉल एक पवित्र स्थान है जहां हमारे पूर्वजों के गौरवशाली इतिहास का बोध होता है। आने वाले दिनों में यह नई पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत रहेगा।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे पंडित रामनरेश त्रिपाठी उर्फ पिण्डीवासा ने कहा, "आधुनिक भारत में स्वतंत्रता आंदोलन का साक्षी है शहीद वॉल, जहां शहीदों की दास्तान के अलावा स्वतंत्रता संग्राम की पूरी कहानी दिखेगी।"
शहीद वॉल के संस्थापक और कार्यक्रम संयोजक वीरेंद्र पाठक ने 1857 की क्रांति पर प्रकाश डालते हुए बताया कि कैसे हिंदू-मुस्लिम मिलकर लियाकत अली और सरदार रामचंद्र की अगुवाई में लड़े। जनविद्रोह ने तब के इलाहाबाद को आजाद कर लिया था। यह आजादी 7 जून से 16 जून तक रही, बाद में ब्रिटिश अधिकारियों ने निर्दयता पूर्वक भारतीयों को मार डाला या फांसी पर चढ़ा दिया। आज, पहली आजादी का अंतिम दिन है, इसलिए अपने पूर्वज क्रांतिकारी और शहीदों को नमन करने के लिए उनकी याद में एक दीपक जलाया गया।
कार्यक्रम का समापन "भारत माता की जय" के उद्घोष के साथ हुआ। कार्यक्रम में अनिल त्रिपाठी (पूर्व डीपीआरओ), जवाहर श्रीवास्तव, अरविंद मालवीय, काली शंकर, मोतीलाल, राहुल दुबे, टीके पांडे, प्रमोद शुक्ला, विनय वर्मा, कादिर भाई, मोहम्मद लईक, नाजिम मालवीय, उत्कर्ष मालवीय, सलमान आमिर, आरव भारद्वाज, मनीष गोविंद आदि प्रमुख रूप से उपस्थित थे।
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