हरियाणा का पलवल जिला इस समय राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े एक बड़े मामले के कारण चर्चा में है। क्राइम ब्रांच ने यहां पाकिस्तान को संवेदनशील जानकारियां भेजने के आरोप में एक और व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान हतीन उपमंडल के कोर्ट गांव निवासी वसीम अकरम के रूप में हुई है। इससे पहले इसी इलाके से अली मेव गांव के तौफीक नामक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया था। महज एक हफ्ते के भीतर दो गिरफ्तारियां होना इस बात की ओर इशारा करता है कि इलाके में जासूसी का कोई बड़ा नेटवर्क सक्रिय हो सकता है।
26 सितंबर को सीआईए पलवल प्रभारी पीएसआई दीपक गुलिया की टीम ने तौफीक को अरेस्ट किया था। आरोप है कि तौफीक भारतीय सेना की गतिविधियों से जुड़ी संवेदनशील जानकारियां पाकिस्तान तक पहुंचा रहा था। इतना ही नहीं, उसने पूछताछ में यह भी कबूल किया कि उसने कई लोगों के वीजा लगवाने में मदद की और उन्हें पाकिस्तान भेजा।
तौफीक के मोबाइल फोन की जांच में सामने आया कि वह लंबे समय से पाकिस्तानी अधिकारियों के संपर्क में था। उसका काम न सिर्फ जानकारियां जुटाना था, बल्कि उन्हें व्यवस्थित तरीके से पाकिस्तान उच्चायोग तक पहुंचाना भी था।
तौफीक से पूछताछ के दौरान ही वसीम अकरम का नाम सामने आया। पुलिस ने तत्काल एक्शन लेते हुए कोर्ट गांव के रहने वाले वसीम को गिरफ्तार किया। जांच में पता चला कि वसीम साल 2021 में पाकिस्तान का वीजा बनवाने के दौरान वहां के दूतावास के अधिकारियों के संपर्क में आया था। यही संपर्क धीरे-धीरे गहरा होता गया और पिछले चार सालों से वह लगातार WhatsApp पर पाकिस्तानी अधिकारियों से बातचीत करता रहा।
पुलिस को शक है कि वसीम ने दिल्ली जाकर उन्हें सिम कार्ड तक मुहैया कराया था, ताकि गुप्त संपर्क कायम रखा जा सके। उसके मोबाइल फोन से कई चैट्स बरामद हुई हैं, हालांकि कुछ को डिलीट कर दिया गया। अब साइबर टीम उन डिलीट किए गए चैट्स को रिकवर करने की कोशिश कर रही है। आशंका जताई जा रही है कि इन चैट्स में भारतीय सेना से जुड़ी महत्वपूर्ण और संवेदनशील जानकारी साझा की गई थी।
इस मामले में पुलिस ने कोर्ट से दोनों आरोपियों के रिमांड की मांग की। तौफीक को न्यायिक हिरासत (जुडीशियल रिमांड) में भेज दिया गया है। वहीं वसीम अकरम को दो दिन की पुलिस कस्टडी मिली है, ताकि उससे गहन पूछताछ और रिकवरी की जा सके। पुलिस का कहना है कि रिमांड के दौरान वे यह पता लगाने की कोशिश करेंगे कि वसीम ने अब तक कौन-कौन सी जानकारियां पाकिस्तान तक पहुंचाई और उसके पीछे किन लोगों का हाथ है।
क्राइम ब्रांच और केंद्रीय एजेंसियां अब इस केस में गहराई से जांच कर रही हैं। उनका मुख्य फोकस यह है कि क्या तौफीक और वसीम महज ‘छोटे मोहरे’ हैं या फिर इनके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क सक्रिय है। अगर ऐसा है, तो यह नेटवर्क कैसे काम कर रहा है और इसके धागे कहां-कहां तक फैले हुए हैं, इसकी पड़ताल शुरू हो चुकी है।
जांचकर्ताओं का मानना है कि इस तरह के मामले अकेले व्यक्ति के दम पर संभव नहीं होते। कहीं न कहीं एक व्यवस्थित तंत्र काम करता है जिसमें सूचनाओं का आदान-प्रदान, आर्थिक लाभ और तकनीकी साधनों का इस्तेमाल होता है।
इस केस का एक और दिलचस्प पहलू यह है कि पहले गिरफ्तार आरोपी तौफीक YouTube चैनल चलाता था। सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल अक्सर प्रचार, भर्ती और नेटवर्किंग के लिए किया जाता है। सुरक्षा एजेंसियां पहले भी इस बात को लेकर अलर्ट जारी कर चुकी हैं कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसियां भारतीय युवाओं को सोशल मीडिया के जरिए अपने जाल में फंसाती हैं।
यह पहला मौका नहीं है जब हरियाणा से जासूसी के मामले सामने आए हों। इसी साल मई महीने में ऑपरेशन सिंदूर के बाद भी पुलिस ने कई लोगों को जासूसी के आरोप में गिरफ्तार किया था। उस समय यूबर ड्राइवर ज्योति मल्होत्रा समेत कई अन्य आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज हुआ था। इस बार भी मामला उसी तरह की गहरी साजिश का संकेत देता है।
भारत और पाकिस्तान के बीच दशकों से चले आ रहे तनाव के बीच इस तरह की घटनाएं चिंता का विषय हैं। भारतीय सेना की गतिविधियों, तैनाती, हथियारों की स्थिति या फिर सीमावर्ती इलाकों में मूवमेंट से जुड़ी कोई भी जानकारी अगर दुश्मन देश तक पहुंचती है तो यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बेहद खतरनाक हो सकता है।
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