प्रतापगढ़ का पट्टी गोलीकांड अब केवल एक साधारण आपराधिक वारदात नहीं रह गया है। जो घटना 21 जुलाई 2025 को सब-रजिस्ट्री ऑफिस के बाहर हुई थी, वह अब प्रदेश और देश की सबसे बड़ी आपराधिक कहानियों में से एक बनती जा रही है। इस मामले का मुख्य आरोपी, बाबा बैखरनाथ धाम से जुड़ा और कथित तौर पर बीजेपी का ब्लॉक प्रमुख रहा सुशील सिंह, पुलिस जांच में न केवल हत्याकांड का आरोपी निकला, बल्कि एक संगठित ड्रग्स माफिया के रूप में भी सामने आया है।
21 जुलाई की दोपहर, पट्टी कस्बे का सब-रजिस्ट्री ऑफिस। लोग अपनी जमीन-जायदाद के कागज़ात निपटाने आए थे। तभी अचानक गोलियों की तड़तड़ाहट ने पूरे इलाके को हिला दिया। दो सगे भाइयों पर अंधाधुंध गोलियां बरसाई गईं। घटना इतनी भयावह थी कि आसपास अफरातफरी मच गई। पुलिस ने जब जांच शुरू की, तो शक की सूई सीधे सुशील सिंह की ओर घूमी।
सुशील सिंह को गिरफ्तार करने के बाद पुलिस ने अदालत से उसका 48 घंटे का रिमांड लिया। शुरुआत में मामला एक गैंगवार और हत्या तक सीमित लग रहा था, लेकिन रिमांड ने इस कहानी का ऐसा अध्याय खोला जिसने सबको चौंका दिया।
पुलिस ने आरोपी की निशानदेही पर लखनऊ के एक मॉल से उसकी लग्जरी Audi कार बरामद की। यह कार उसी वारदात में इस्तेमाल हुई थी। एक छोटे जिले के ब्लॉक प्रमुख के पास इतनी महंगी कार होना अपने आप में कई सवाल खड़े करता है।
लेकिन असली विस्फोटक खुलासा तब हुआ जब पुलिस ने पट्टी के रायपुर रोड स्थित सुशील के एक पैलेस जैसे ठिकाने से जमीन खुदवाई। वहां से बरामद हुई 34 किलो 10 ग्राम एमडी (ड्रग्स)। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, यह कोई साधारण मात्रा नहीं थी बल्कि इससे साफ संकेत मिलता है कि सुशील सिंह लंबे समय से अंतरराज्यीय नशे के धंधे में सक्रिय था।
इतने बड़े खुलासे के बाद पुलिस ने आरोपी को जब कोर्ट में पेश किया तो पूरा माहौल हाई-प्रोफाइल लग रहा था। सुशील सिंह को हेलमेट और बुलेटप्रूफ जैकेट पहनाकर पेश किया गया। अदालत में पेशी के बाद मेडिकल जांच कराई गई और फिर उसे जेल भेज दिया गया।
अब उसके खिलाफ पट्टी कोतवाली में नया मुकदमा दर्ज हो चुका है। हत्या और गैंगवार के आरोपों के साथ-साथ अब उस पर ड्रग्स तस्करी का केस भी जुड़ गया है।
जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, यह साफ होता गया कि मामला केवल प्रतापगढ़ तक सीमित नहीं है। सुशील सिंह का नेटवर्क उत्तर प्रदेश से बाहर भी फैला हुआ था। हरियाणा और महाराष्ट्र पुलिस ने भी इस केस में सक्रिय भूमिका निभानी शुरू की है।
जानकारी के अनुसार, हरियाणा पुलिस ने पहले ही एक आरोपी लवि मिश्रा को ड्रग्स कनेक्शन में गिरफ्तार किया था। उसके मोबाइल रिकॉर्ड और सीडीआर खंगालने के बाद सुशील सिंह के साथ संबंधों की पुष्टि हुई। यही वजह है कि अब हरियाणा और महाराष्ट्र पुलिस भी इस केस में पूछताछ करने के लिए आगे आ सकती हैं।
पट्टी गोलीकांड अब केवल प्रतापगढ़ जिले की घटना नहीं रह गया है। यह मामला प्रदेश के राजनीतिक और आपराधिक ताने-बाने को झकझोर रहा है।
इलाके के लोग अब दहशत में हैं। गांव-गांव में चर्चा है कि सुशील सिंह जैसे लोग आखिर कितने समय से यह धंधा चला रहे थे और पुलिस व सिस्टम की आंखों पर पर्दा क्यों पड़ा रहा।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह केस अब "हाई-प्रोफाइल" केटेगरी में रखा गया है। सीडीआर, बैंक लेन-देन, प्रॉपर्टी इन्वेस्टिगेशन और दूसरे राज्यों से कनेक्शन की जांच तेज कर दी गई है। अधिकारी साफ कर चुके हैं कि जो भी लोग इस नेटवर्क से जुड़े होंगे, चाहे वे कितने ही बड़े नाम क्यों न हों, उन पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई होगी।
सुशील सिंह की राजनीतिक पहचान और बाबा बैखरनाथ धाम से उसका जुड़ाव भी सवालों के घेरे में है। विपक्षी दल इस मामले को लेकर सरकार पर हमलावर हो सकते हैं कि आखिर इस तरह के अपराधी किस संरक्षण में फल-फूलते रहे।
स्थानीय लोगों का कहना है कि नशे के कारोबार ने युवाओं को बर्बाद किया है और अगर पुलिस की कार्रवाई समय रहते होती, तो शायद दर्जनों परिवार आज बिखरने से बच जाते।
पट्टी गोलीकांड की कहानी अब हत्या और गैंगवार से कहीं आगे निकल चुकी है। यह मामला न केवल प्रतापगढ़ बल्कि पूरे उत्तर भारत में फैले एक ड्रग्स नेटवर्क को उजागर करता है। सुशील सिंह की गिरफ्तारी के बाद पुलिस की अगली कार्रवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं।
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