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एशिया कप ट्रॉफी विवाद पर एबी डिविलियर्स की राय, भारतीय फैंस का गुस्सा

एशिया कप ट्रॉफी विवाद पर एबी डिविलियर्स की राय, भारतीय फैंस का गुस्सा

अंतरराष्ट्रीय

  •  03 Oct 2025
  •  शिवंलेख
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नई दिल्ली। एशिया कप 2025 का फाइनल मैच दुबई में भारत और पाकिस्तान के बीच खेला गया। भारत ने पाकिस्तान को हराकर खिताब तो अपने नाम किया, लेकिन इस जीत के बाद ट्रॉफी वितरण को लेकर एक ऐसा विवाद खड़ा हो गया जिसने खेल को राजनीति से जोड़ दिया। इस विवाद में अब साउथ अफ्रीका के पूर्व दिग्गज बल्लेबाज़ एबी डिविलियर्स भी कूद पड़े हैं। उन्होंने अपनी राय रखी और इसी राय के चलते भारतीय क्रिकेट फैंस का गुस्सा उन पर फूट पड़ा।

दरअसल, मैच के बाद ट्रॉफी भारतीय टीम को एशियन क्रिकेट काउंसिल (ACC) के प्रेसिडेंट मोहसीन नकवी के हाथों से मिलनी थी। लेकिन भारतीय खिलाड़ियों ने उनसे ट्रॉफी लेने से इंकार कर दिया। वजह साफ थी—नकवी सिर्फ एसीसी चीफ ही नहीं बल्कि पाकिस्तान सरकार में इंटीरियर मिनिस्टर भी हैं। हाल ही में उन्होंने भारत-पाकिस्तान बॉर्डर विवाद और आतंकवादी घटनाओं पर कई भड़काऊ बयान दिए थे।

टीम इंडिया का रुख यही था कि एक ऐसे शख्स से ट्रॉफी लेना, जिसने बार-बार भारत विरोधी बयान दिए हों और जिनका सीधा ताल्लुक पाकिस्तान की राजनीति से हो, खेल की भावना के खिलाफ है। यही वजह रही कि भारतीय खिलाड़ियों ने सम्मानपूर्वक ट्रॉफी ग्रहण करने से मना कर दिया।

इसके बाद स्थिति और बिगड़ गई। जब भारतीय टीम ने ट्रॉफी लेने से इनकार किया, तो मोहसीन नकवी खुद ट्रॉफी देने से पीछे हट गए। यहां तक कि उन्होंने मंच से ट्रॉफी उठाकर ले जाने जैसा कदम उठाया। भारतीय टीम जीत के बाद मंच पर खड़ी रही लेकिन उनके हाथ में ट्रॉफी नहीं थी।

इसी विवाद पर एबी डिविलियर्स ने अपने यूट्यूब शो में कहा—
“खेल को राजनीति से अलग रखना चाहिए। मुझे लगता है भारत का यह रवैया ठीक नहीं था। हां, टीम इंडिया को शायद ट्रॉफी देने वाले शख्स से दिक्कत रही होगी, लेकिन खेल अपनी जगह है। उसे उसी तरह सेलिब्रेट करना चाहिए। यह देखना दुखद है। उम्मीद है भविष्य में हालात सुधरेंगे।”

डिविलियर्स का यह बयान भारतीय क्रिकेट फैंस को नागवार गुज़रा। उनका मानना है कि डिविलियर्स खेल के नाम पर एक राजनीतिक शख्सियत की भूमिका को नजरअंदाज कर रहे हैं, जबकि असली विवाद की जड़ वही है।

डिविलियर्स की इस टिप्पणी के बाद भारतीय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर गुस्सा फूट पड़ा। हजारों यूज़र्स ने उन्हें निशाने पर लिया।

  • एक यूज़र ने लिखा, “मिलिए एबी डिविलियर्स से, जो आईपीएल में पैसा कमाने आते हैं और फिर BCCI के स्टैंड की आलोचना करते हैं।”
  • दूसरे ने कहा, “शायद डिविलियर्स को इस विवाद की गंभीरता समझ में नहीं आई। जब समझ नहीं है तो चुप रहना ही बेहतर है।”
  • वहीं एक और यूज़र ने तंज कसा, “ब्लड को लगता है ट्रॉफी देश से बड़ी है क्योंकि उसने असली ट्रॉफी कभी छुई ही नहीं।”

ऐसे तमाम कमेंट्स के बीच भारतीय फैंस ने साफ किया कि उनके लिए यह मुद्दा सिर्फ खेल का नहीं बल्कि सम्मान और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा है।

भारतीय फैंस का तर्क यही रहा कि अगर मोहसीन नकवी सिर्फ एसीसी के प्रमुख होते तो शायद मामला इतना नहीं बिगड़ता। लेकिन पाकिस्तान सरकार में मंत्री पद संभालते हुए उन्होंने भारत के खिलाफ कई बार सख्त और भड़काऊ बयान दिए हैं।

याद दिला दें कि एशिया कप से ठीक पहले हुए पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच यह पहली भिड़ंत थी। उस हमले में शहीद हुए जवानों की यादें ताज़ा थीं। ऐसे में भारतीय टीम ने फाइनल जीतने के बाद इस जीत को भारतीय सेना और हमले के पीड़ितों को समर्पित किया। स्वाभाविक था कि ट्रॉफी ग्रहण का मंच राजनीति से अलग नहीं रह सकता था।

पूरा टूर्नामेंट ही तनाव और विवादों से भरा रहा। हाथ मिलाने तक को लेकर बहस छिड़ी। पाकिस्तानी खिलाड़ियों के भड़काऊ इशारे और दर्शकों के बीच तनाव ने माहौल को और गरमा दिया। फाइनल में जब भारत ने पाकिस्तान को हराया तो कैप्टन सूर्यकुमार यादव ने जीत को शहीदों और भारतीय सेना को समर्पित कर दिया।

इसके बावजूद मोहसीन नकवी का रवैया आक्रामक ही रहा। बाद में उन्होंने भारतीय कप्तान को अबू धाबी स्थित एसीसी मुख्यालय आकर ट्रॉफी लेने का न्योता दिया, जिसे बीसीसीआई अधिकारियों ने सख्त लहजे में खारिज कर दिया।

इस पूरे विवाद का असर इतना रहा कि भारतीय फैंस के लिए जीत का जश्न अधूरा रह गया। भले ही टीम इंडिया ने पाकिस्तान को 3–0 से क्लीन स्वीप किया, लेकिन मंच पर खिलाड़ियों के हाथ खाली रहना एक अजीब तस्वीर बन गया।

दूसरी ओर, पाकिस्तान के खिलाड़ी और वहां की मीडिया इस मौके का इस्तेमाल भारत पर आरोप लगाने के लिए करती रही। वहीं भारत के क्रिकेट प्रेमियों ने साफ कहा कि ट्रॉफी से बड़ा सम्मान है, और सम्मान से बड़ा देश है।

एबी डिविलियर्स जैसे दिग्गज जब कहते हैं कि खेल को राजनीति से अलग रखना चाहिए, तो यह बात सुनने में अच्छी लगती है। लेकिन सवाल यह है कि जब ट्रॉफी देने वाला शख्स ही राजनीति का बड़ा चेहरा हो और खेल को राजनीति से जोड़कर भड़काऊ बयान देता हो, तो क्या खेल सच में राजनीति से अलग रह सकता है?

भारतीय क्रिकेट फैंस का मानना है कि टीम इंडिया ने जो रुख अपनाया वह खेल भावना के खिलाफ नहीं बल्कि राष्ट्र की गरिमा के पक्ष में था। ट्रॉफी चाहे हाथ में न आई हो, लेकिन भारत ने मैदान और दिल दोनों में बाज़ी मार ली।

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