बुधवार, 5 जून को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। मोदी राष्ट्रपति भवन पहुंचे और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात कर मंत्रिपरिषद के साथ अपना इस्तीफा सौंपा। राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री मोदी का इस्तीफा स्वीकार करते हुए उनसे नई सरकार के गठन तक पद पर बने रहने का अनुरोध किया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई सरकार के गठन को लेकर दिल्ली में होने वाली एनडीए (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) की बैठक से पहले अपना इस्तीफा सौंपा। राष्ट्रपति भवन द्वारा जारी एक विज्ञप्ति में इस जानकारी की पुष्टि की गई। विज्ञप्ति में कहा गया, "प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने आज राष्ट्रपति से मुलाकात की और मंत्रिपरिषद के साथ अपना इस्तीफा उन्हें सौंप दिया। राष्ट्रपति ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया है और श्री नरेंद्र मोदी एवं मंत्रिपरिषद से अनुरोध किया है कि वे नई सरकार के कार्यभार संभालने तक पद पर बने रहें।"
इससे पहले, सूत्रों के अनुसार केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 17वीं लोकसभा को भंग करने की सिफारिश की थी। मौजूदा लोकसभा का कार्यकाल 16 जून को समाप्त हो रहा है।
एनडीए की बैठक आज दिल्ली में आयोजित की जाएगी। लोकसभा चुनाव में सत्तारूढ़ गठबंधन को बहुमत मिलने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीसरे कार्यकाल का मार्ग प्रशस्त होने के एक दिन बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के वरिष्ठ नेता नई सरकार के गठन को लेकर विचार-विमर्श करेंगे। इस बैठक में तेलुगू देशम पार्टी (तेदेपा) के अध्यक्ष एन चंद्रबाबू नायडू, जनता दल (यूनाइटेड) के नेता और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, शिवसेना नेता एवं महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास लोजपा) के नेता चिराग पासवान और भाजपा तथा उसके अन्य सहयोगी दलों के शीर्ष नेता शामिल होंगे।
इस घटनाक्रम से स्पष्ट होता है कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एनडीए ने लोकसभा चुनाव में निर्णायक जीत हासिल की है और अब नई सरकार के गठन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इस महत्वपूर्ण समय में सभी राजनीतिक दलों के शीर्ष नेताओं का एकत्रित होना आगामी सरकार की संरचना और दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगा।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) को 294 सीटों के साथ बहुमत मिला है। इस स्थिति में माना जा रहा है कि देश में एनडीए की ही सरकार बनेगी। हालांकि, भाजपा को अपने बलबूते बहुमत नहीं मिला है, इसलिए दिल्ली में राजनीतिक दांव-पेच का दौर जारी है।
इस घटनाक्रम से स्पष्ट होता है कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एनडीए ने लोकसभा चुनाव में निर्णायक जीत हासिल की है। अब नई सरकार के गठन की प्रक्रिया में सभी राजनीतिक दलों के शीर्ष नेता अपनी भूमिका निभा रहे हैं। यह समय राजनीतिक दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है और नई सरकार की संरचना और दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगा।
नरेंद्र मोदी के इस्तीफा देने के बाद, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रधानमंत्री और केंद्रीय मंत्रिपरिषद से नई सरकार बनने तक कार्यवाहक प्रधानमंत्री बने रहने का अनुरोध किया है। इसका मतलब यह है कि नई सरकार और प्रधानमंत्री के शपथ ग्रहण करने तक नरेंद्र मोदी ही देश के कार्यवाहक प्रधानमंत्री बने रहेंगे।
वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में, नई सरकार की सूरत बदली-बदली नजर आ रही है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को इस बार अपने बलबूते पर बहुमत नहीं मिल पाया है और उसे सरकार गठन के लिए अपने सहयोगी दलों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (एनडीए) ने 543 सदस्यीय लोकसभा में बहुमत के 272 के आंकड़े को पार कर लिया है, लेकिन भाजपा को 2014 के बाद पहली बार बहुमत के जादुई आंकड़े से पीछे रहना पड़ा है।
इस बार सरकार गठन के सिलसिले में तेलुगु देशम पार्टी (तेदेपा) और जनता दल यूनाइटेड (जदयू) जैसे दलों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। ये दल कुछ महत्वपूर्ण विभागों की मांग कर सकते हैं, क्योंकि उनका समर्थन सरकार के गठन और अस्तित्व के लिए आवश्यक होगा। भाजपा को अपनी सरकार चलाने के लिए इन दलों के साथ संतुलन बनाना पड़ेगा।
2014 के चुनावों में भाजपा ने अकेले ही बहुमत हासिल किया था, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हो पाया है। इसके कारण भाजपा को अपनी नीतियों और योजनाओं में अपने सहयोगी दलों की मांगों और आवश्यकताओं का ध्यान रखना होगा। यह स्थिति न केवल सरकार की कार्यप्रणाली को प्रभावित करेगी, बल्कि नई सरकार की सूरत को भी बदल सकती है।
हालांकि एनडीए ने बहुमत हासिल कर लिया है, लेकिन भाजपा का बहुमत से पीछे रहना दर्शाता है कि आने वाले समय में सरकार की नीतियों और फैसलों में अधिक सामंजस्य और सहयोग की आवश्यकता होगी। यह स्थिति सरकार के गठन के दौरान और उसके बाद भी दिखाई दे सकती है।
© Copyright 2026 by शिवंलेख - Design & Developed By Codes Acharya