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जब जिद पे आ गई पार्वती (Jab Zid Pe Aagayi Parvati) - भजन

ॐ शंभू, शिव शंभू! भोलेनाथ!

जब जिद पे आ गई पार्वती,

पार्वती, पार्वती

समझाने पहुँचे सप्तऋषि

सप्तऋषि, सप्तऋषि

अर्थ: जब माता पार्वती ने भगवान शिव को ही अपना वर चुनने का दृढ़ निश्चय कर लिया, तब उन्हें समझाने के लिए सप्तऋषि उनके पास पहुँचे।

काय जिद कर-रही

काय को हुमर-रही

काय जिद कर-रही

काय को हुमर-रही

ऐसे वर के लाने

ऐसे वर के लाने

अर्थ: सप्तऋषि पार्वती से पूछते हैं कि तुम ऐसी जिद क्यों कर रही हो और ऐसे वर को पति के रूप में क्यों चुनना चाहती हो।

जाके सीस पे गंगा और गले में

डाले फिर रहे साँप

जाके सीस पे गंगा और गले में

डाले फिर रहे साँप

इतने सीधे-सादे हैं सब कहते

भोलेनाथ, भोलेनाथ

सब कहते, भोलेनाथ

अर्थ: भगवान शिव के सिर पर पवित्र गंगा विराजमान हैं और उनके गले में सर्प सुशोभित है। उनका रूप भले ही साधारण और रहस्यमय दिखाई देता है, लेकिन वे अत्यंत सरल, दयालु और भोले स्वभाव के हैं। इसी कारण सभी उन्हें भोलेनाथ कहते हैं।

जाके सीस पे गंगा और गले में

डाले फिर रहे साँप

जाके सीस पे गंगा और गले में

डाले फिर रहे साँप

इतने सीधे-सादे हैं सब कहते

भोलेनाथ, भोलेनाथ

अर्थ: शिवजी के सिर पर गंगा और गले में नाग हैं। उनका जीवन और वेश सामान्य सांसारिक लोगों से अलग है, फिर भी वे सरल हृदय और भक्तों पर कृपा करने वाले भोलेनाथ हैं।

ना खपरा ना छपरा

ना फूस की धरे मड़ैया

का खावे को धरो वहाँ

बस रोवत रहत लड़ैयाँ

अर्थ: सप्तऋषि बताते हैं कि शिवजी के पास कोई पक्का घर, छप्पर या साधारण झोपड़ी तक नहीं है। उनके पास सांसारिक सुख-सुविधाओं का कोई मोह नहीं है और उनका जीवन वैराग्य से भरा हुआ है।

ना खपरा ना छपरा

ना फूस की धरे मड़ैया

का खावे को धरो वहाँ

बस रोवत रहत लड़ैयाँ

अर्थ: शिवजी सांसारिक गृहस्थ जीवन और भौतिक सुविधाओं से दूर रहते हैं। उनका जीवन त्याग, तपस्या और वैराग्य का प्रतीक है।

भेष धरे अवधूत फिरे

अब तुमसे का का कहे बिन्नूं

डोरा डाँगर ले घूमे

वे बिनकें कछुऐनैयाँ

वे बिनकें कछुऐनैयाँ

अर्थ: शिवजी अवधूत का रूप धारण करके विचरण करते हैं। उनका पहनावा और रहन-सहन सामान्य लोगों जैसा नहीं है। वे संसार की दिखावे वाली परंपराओं से परे, स्वतंत्र और विरक्त जीवन जीते हैं।

काय जिद कर-रही

काय को हुमर-रही

काय जिद कर-रही

काय को हुमर-रही

ऐसे वर के लाने

ऐसे वर के लाने

अर्थ: सप्तऋषि फिर माता पार्वती को समझाते हैं कि तुम ऐसे विरक्त और अनोखे व्यक्ति को अपना वर क्यों बनाना चाहती हो।

जाके सीस पे गंगा और गले में

डाले फिर रहे साँप

जाके सीस पे गंगा और गले में

डाले फिर रहे साँप

इतने सीधे-सादे हैं सब कहते

भोलेनाथ, भोलेनाथ

सब कहते, भोलेनाथ

अर्थ: शिवजी का रूप भले ही साधारण दृष्टि से विचित्र और भयंकर लगे, लेकिन उनके भीतर करुणा, सरलता और भक्तों के प्रति असीम प्रेम है। इसलिए वे भोलेनाथ कहलाते हैं।

शंभू, शिव शंभू ! भोलेनाथ !

अर्थ: यह भगवान शिव की स्तुति और जयकार है। भक्त प्रेम और श्रद्धा से शिवजी को शंभू, शिव और भोलेनाथ कहकर पुकारते हैं।

जटा लटा ना कबहूँ सँबारे

जटा लटा ना कबहूँ सँबारे

दीसत महा भयंकर

मुड़ें पे आधी चंदा और

बेला पे घूमत शंकर

अर्थ: भगवान शिव की विशाल जटाएँ उनके तपस्वी और विरक्त स्वरूप को दर्शाती हैं। उनका रूप देखने में अत्यंत भयंकर प्रतीत हो सकता है। उनके मस्तक पर अर्धचंद्र सुशोभित है और वे संसार में अपनी दिव्य लीला करते हुए विचरण करते हैं।

राम नाम के रसिया हैं वे

और उन्हें क्या चाहने

कामदेव के मर्दनहारी

घर-गुहस्थी क्या जानें

वे घर-गुहस्थी क्या जानें

अर्थ: भगवान शिव भगवान राम के नाम के प्रेमी और भक्त हैं। उन्होंने कामदेव पर विजय प्राप्त की है और वे सांसारिक इच्छाओं से ऊपर हैं। सप्तऋषियों को लगता है कि ऐसे महान तपस्वी को गृहस्थ जीवन का क्या अनुभव होगा।

काय जिद कर-रही

काय को हुमर-रही

काय जिद कर-रही

काय को हुमर-रही

ऐसे वर के लाने

ऐसे वर के लाने

अर्थ: सप्तऋषि माता पार्वती को समझाते हुए कहते हैं कि तुम भगवान शिव को ही अपना वर बनाने की जिद क्यों कर रही हो।

जाके सीस पे गंगा और गले में

डाले फिर रहे साँप

जाके सीस पे गंगा और गले में

डाले फिर रहे साँप

इतने सीधे-सादे हैं सब कहते

भोलेनाथ, भोलेनाथ

सब कहते, भोलेनाथ

अर्थ: भगवान शिव का स्वरूप अद्भुत है—सिर पर गंगा, गले में नाग और शरीर पर वैराग्य का भाव। फिर भी वे अत्यंत सरल, दयालु और भक्तवत्सल हैं। यही उनका भोला स्वरूप है।

जाके सीस पे गंगा और गले में

डाले फिर रहे साँप

जाके सीस पे गंगा और गले में

डाले फिर रहे साँप

इतने सीधे-सादे हैं सब कहते

भोलेनाथ, भोलेनाथ

अर्थ: शिवजी का रूप संसार से अलग है, लेकिन उनका हृदय निर्मल और करुणामय है। भक्त इसी सरलता के कारण उन्हें प्रेम से भोलेनाथ कहते हैं।

भोले बमभोले! भोले बमभोले!

भोले बमभोले! भोले बमभोले!

भोले बमभोले! भोले बमभोले!

अर्थ: यह भगवान शिव की भक्ति और जयकार का उद्घोष है। “बम भोले” के जयघोष के माध्यम से भक्त भगवान शिव के प्रति अपनी श्रद्धा, प्रेम और समर्पण व्यक्त करते हैं।

Movie: Hanuman Ansh (2026)

Composer / Singer: Sadhu Tiwari