Delhi Metro News : 15-16 अगस्त की रात करीब 1:00 बजे दिल्ली मेट्रो की येलो लाइन पर एक ऐसी घटना हुई, जिसने महिलाओं की प्राइवेसी (Privacy) और पब्लिक प्लेसेस (Public Places) पर सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। AIIMS मेट्रो स्टेशन के पास चलती एक ट्रेन में CISF वर्दीधारी जवान पर एक महिला यात्री की बिना सहमति गुप्त रूप से तस्वीरें खींचने का आरोप लगा। कुछ लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि CISF जवान को जब महिला ने कंफ्रंट (Confront) किया तो उसने कथित तौर पर अपनी सर्विस पिस्तल (Service Pistol) निकालकर तान दी। इसके बाद कोच में हुए हंगामे की वायरल वीडियो (Viral Video) ने राजधानी के पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर नई बहस छेड़ दी है। इस कथित घटना के बाद वर्दीधारी सुरक्षा अधिकारियों की क्रेडिबिलिटी (Credibility) पर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं। आखिर क्या था यह विवाद? विस्तार से समझेंगे इस वीडियो में।
15-16 अगस्त की रात AIIMS मेट्रो स्टेशन के पास चल रही एक ट्रेन के कोच में एक महिला सफर कर रही थी। उसी कोच में वर्दी पहने CISF का एक ASI भी मौजूद था। सफर के दौरान महिला को अचानक ऐसा लगा कि जवान अपने फोन से चुपके से उनकी तस्वीरें ले रहा है।
महिला ने तुरंत जवान से पूछा कि वह उनकी तस्वीरें क्यों ले रहा है? जवान ने पहले आरोप से इनकार (Deny) करते हुए कहा कि उसने कोई तस्वीर नहीं ली। लेकिन जब साथी यात्रियों ने हस्तक्षेप किया और उसका फोन चेक किया तो कथित तौर पर उसकी गैलरी में महिला की तस्वीरें मिलीं।
महिला ने फोन लेकर तस्वीरें डिलीट (Delete) करने की मांग की। लेकिन जवान ने फोन देने से इनकार कर दिया। इसके बाद कोच में बहस बढ़ती गई और मामला धक्कामुक्की और कॉलर पकड़ने तक पहुंच गया।
इसी दौरान कुछ यात्रियों ने आरोप लगाया कि जवान ने अपनी सर्विस पिस्तल (Service Pistol) निकालकर उनकी तरफ तान दी। हालांकि मेट्रो पुलिस ने इस दावे का खंडन (Denial) करते हुए यह कहा कि बंदूक तानने जैसी कोई घटना नहीं हुई थी। वायरल वीडियो में भी ऐसा कुछ नहीं देखा गया है।
पूरी घटना को यात्रियों ने अपने मोबाइल कैमरा से रिकॉर्ड कर लिया और वीडियो सोशल मीडिया पर अब वायरल हो रही है।
महिला यात्री का सीधा आरोप था कि वर्दी में सफर कर रहे CISF के जवान ने चलती मेट्रो में बिना उनकी सहमति (Consent) के उनकी तस्वीरें खींची। सार्वजनिक जगह पर यात्रियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालने वाले जवान पर लगा यह आरोप अपने आप में बेहद गंभीर था।
शुरुआती बहस में जवान ने आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि उसने कोई तस्वीर नहीं खींची। इसके बाद आसपास के यात्रियों ने इंटरवीन (Intervene) किया। उनका दावा था कि फोन की गैलरी खोलने पर उसमें महिला की कई तस्वीरें मौजूद थीं। हालांकि यह दावा मौके पर मौजूद यात्रियों का है और इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है।
घटना के बाद फोन को CISF के वरिष्ठ अधिकारियों ने अपने कब्जे में ले लिया और इसकी जांच जारी है।
यह मामला सिर्फ एक जवान के बिहेवियर (Behaviour) का नहीं है बल्कि क्रेडिबिलिटी (Credibility) पर भी सवाल खड़े करता है। दिल्ली मेट्रो की सुरक्षा में तैनात एक असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर (Assistant Sub Inspector), जिसका काम यात्रियों की हिफाजत करना है, जब उसी पर एक महिला की प्राइवेसी (Privacy) ब्रीच करने का आरोप लगता है तो सवाल सीधे सिक्योरिटी सिस्टम और उनकी अकाउंटेबिलिटी (Accountability) पर उठ जाता है।
फिलहाल यह गंभीर आरोप है और इसकी जांच चल रही है। महिला ने अभी तक पुलिस में कोई औपचारिक लिखित शिकायत दर्ज नहीं कराई है। फोन में वास्तव में तस्वीरें थीं या नहीं, यह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा।
भारतीय न्याय संहिता यानी BNS की धारा 77 ताक-झांक यानी वॉयरिज्म (Voyeurism) को अपराध मानती है। इसमें किसी भी महिला की सहमति (Consent) के बिना उसकी तस्वीरें लेना कई सिचुएशंस (Situations) में अपराध माना जा सकता है।
अब यह समझते हैं कि उस रात बात कॉलर पकड़ने से लेकर सर्विस पिस्तल (Service Pistol) तानने तक कैसे पहुंच गई।
कोच के भीतर जब महिला ने आवाज उठाई तो आसपास मौजूद यात्री भी तुरंत उस बहस में शामिल हो गए। यात्रियों ने एक सुर में जवान से तस्वीरें डिलीट (Delete) करने और फोन दिखाने की मांग की।
लेकिन जब जवान ने फोन देने से साफ इनकार कर दिया तो माहौल और ज्यादा तनावपूर्ण हो गया। बहस जैसे ही तीखी हुई, जवान ने खुद को घिरता देख कोच से बाहर निकलने की कोशिश की। लेकिन यात्रियों ने उसका रास्ता रोक लिया और बात धक्कामुक्की तक पहुंच गई।
इसी छीना-झपटी के दौरान कुछ यात्रियों ने जवान का कॉलर पकड़ लिया और उसे कोच से बाहर निकलने से मना कर दिया।
इसी बीच सर्विस पिस्तल (Service Pistol) निकालने का दावा भी सामने आया, जिसे लेकर दो बिल्कुल अलग पक्ष हैं। कोच में मौजूद कुछ यात्रियों का आरोप था कि प्लेटफॉर्म पर उतरने से ठीक पहले जवान ने अपनी सर्विस पिस्तल निकाली और यात्रियों की तरफ तान दी।
वहीं दूसरी ओर पुलिस ने इस दावे का पूरी तरह खंडन करते हुए यह कहा कि हथियार निकालने या तानने जैसी कोई घटना नहीं हुई थी। वायरल वीडियो में भी पिस्तल निकालने से जुड़ी कोई घटना नहीं देखी गई।
फिलहाल दोनों ही पक्ष आधिकारिक तौर पर जांच के दायरे में हैं और सच्चाई डिपार्टमेंटल इंक्वायरी (Departmental Inquiry) पूरी होने के बाद सामने आएगी।
यहां सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो (Viral Video) की सीमाओं को भी समझना जरूरी है। इंटरनेट पर फैला वीडियो उस पूरी घटना का केवल एक छोटा सा हिस्सा दिखाता है। कैमरे के रोल होने से पहले क्या हुआ और वीडियो बंद होने के बाद स्थिति कैसे संभली? यह सब उस क्लिप में रिकॉर्डेड नहीं है। इसीलिए सिर्फ एक वायरल वीडियो को पूरी घटना की मुकम्मल सच्चाई नहीं माना जा सकता।
इस घटना के बाद दिल्ली मेट्रो पुलिस और CISF ने कार्रवाई की। रात करीब 12:40 पर दिल्ली मेट्रो पुलिस को PCR कॉल मिली। सूचना मिलते ही पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे और CISF के ASI को अपनी कस्टडी (Custody) में ले लिया।
इसके बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए जवान को CISF के वरिष्ठ अधिकारियों के हवाले कर दिया गया। मामला सामने आते ही CISF ने भी एक्शन लिया। आरोपी जवान को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड (Suspend) कर दिया गया और उसके खिलाफ एक डिटेल्ड डिपार्टमेंटल इंक्वायरी (Detailed Departmental Inquiry) के आदेश दे दिए गए।
CISF दिल्ली मेट्रो ने अपनी आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर बयान जारी कर कहा कि इस मामले को बेहद गंभीरता से लिया जा रहा है और किसी भी तरह की इनडिसिप्लिन (Indiscipline) या मिसकंडक्ट (Misconduct) को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
हालांकि इस पूरे मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि महिला यात्री ने पुलिस में कोई औपचारिक लिखित शिकायत दर्ज नहीं कराई है। ऐसे में पुलिस के मुताबिक फिलहाल कोई आपराधिक FIR दर्ज नहीं की गई है। आगे की कानूनी कार्रवाई औपचारिक शिकायत और जांच के सामने आने वाले तथ्यों पर निर्भर करेगी।
फिलहाल जवान सस्पेंडेड (Suspended) है। डिपार्टमेंटल इंक्वायरी (Departmental Inquiry) भी जारी है। उसके मोबाइल फोन की जांच के जरिए घटना से जुड़े तथ्यों की पुष्टि करने की कोशिश की जा रही है।
अब बात करते हैं इस पूरे मामले से जुड़े उन बुनियादी सवालों की, जो सीधे सुरक्षा व्यवस्था, वर्दी की जवाबदेही और आम जनता के भरोसे से जुड़े हैं।
सबसे पहला सवाल यह है कि जब किसी नागरिक की प्राइवेसी (Privacy) का उल्लंघन हो तो वह क्या करे? इस मामले में यात्रियों ने खुद आगे आकर विरोध किया और उसका कॉलर तक पकड़ लिया। कानूनी तौर पर आम नागरिक किसी सुरक्षा बल के जवान से हाथापाई नहीं कर सकते।
लेकिन सवाल यह भी उठता है कि अगर उस रात यात्रियों ने इंटरवीन (Intervene) नहीं किया होता तो क्या जवान वहां से निकल जाता? जब आरोप वर्दी पहने किसी सुरक्षाकर्मी पर ही हो तो मौके पर तुरंत शिकायत दर्ज कराने और मदद पाने की व्यवस्था कितनी आसान और प्रभावशाली है, यह एक बड़ा सवाल है।
दिल्ली मेट्रो में हर दिन लाखों लोग सफर करते हैं और सुरक्षा की जिम्मेदारी CISF संभालती है। ऐसे में CISF की वर्दी पर लोगों का भरोसा बेहद जरूरी है। जब उसी वर्दीधारी जवान पर एक महिला की प्राइवेसी ब्रीच (Privacy Breach) करने का आरोप लगे तो चोट सिर्फ उस महिला के भरोसे को नहीं बल्कि पूरे सिस्टम पर लगती है।
दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन यानी DMRC के नियमों के मुताबिक मेट्रो परिसर यानी ट्रेन के भीतर बिना अनुमति प्रोफेशनल फोटोग्राफी (Professional Photography), वीडियोग्राफी (Videography) या किसी दूसरे यात्री की सहमति के बिना उसकी तस्वीर लेना पूरी तरह प्रतिबंधित है। यह यात्रियों की निजता और सुरक्षा के बुनियादी अधिकार का खुला उल्लंघन माना जाता है।
सबसे गंभीर नियम CISF के सर्विस कंडक्ट रूल्स (Service Conduct Rules) का है। एक वर्दीधारी ऑफिसर के लिए ड्यूटी के दौरान या पब्लिकली डिसिप्लिन (Discipline), डिग्निटी (Dignity) और नागरिकों की सुरक्षा अटमोस्ट प्रायोरिटी (Utmost Priority) होती है।
ड्यूटी पर तैनात किसी भी जवान द्वारा यात्रियों की तस्वीरें लेना न केवल नियमों का सीधा उल्लंघन है बल्कि टर्म्स ऑफ सर्विस (Terms of Service) के तहत मिसकंडक्ट (Misconduct) माना जाता है।
इसके बाद दोषी पाए जाने पर जवान के खिलाफ सस्पेंशन (Suspension) से लेकर टर्मिनेशन (Termination) तक की कठोर कार्रवाई का प्रावधान है।
दिल्ली मेट्रो जैसे विशाल नेटवर्क में तमाम CCTV और सिक्योरिटी प्रोटोकॉल्स (Security Protocols) के बावजूद अगर एक महिला को अपनी हिफाजत के लिए खुद एक सुरक्षाकर्मी का सामना करना पड़े तो सवाल सिर्फ एक घटना पर नहीं उठता बल्कि उस पूरे सिस्टम पर उठता है।
यह Delhi NCR News, Delhi NCR News Today और Delhi NCR News in Hindi के लिहाज से भी एक महत्वपूर्ण मामला है, क्योंकि यह सीधे दिल्ली मेट्रो में यात्रियों की सुरक्षा, महिलाओं की प्राइवेसी और सुरक्षा व्यवस्था में लोगों के भरोसे से जुड़ा हुआ है।
CISF jawan accused of taking a woman's photo video goes viral — इस घटना से जुड़ा वायरल वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में है, लेकिन पूरी सच्चाई डिपार्टमेंटल इंक्वायरी और आधिकारिक जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।