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Inflation Rise: चीनी की कीमतों में तेजी से बढ़ी महंगाई, प्याज-दाल और खाने के तेल पर भी दबाव

आपके घर की रसोई का बजट आने वाले दिनों में और बिगड़ सकता है क्योंकि महंगाई सिर्फ एक चीज में नहीं बढ़ रही। चीनी महंगी हो रही है। प्याज महंगा हो गया है। दाल के दाम ऊपर जा रहे हैं और खाने के तेल पर भी दबाव आ रहा है। सबसे बड़ी बात यह है कि इन चीजों की कीमतें बढ़ने की वजह अभी खत्म नहीं हुई है। यानी जो सामान आज आपकी जेब पर भारी पड़ रहा है, कल उसकी कीमत और बढ़ सकती है।

आखिर ऐसा क्या हो रहा है कि रसोई की कई जरूरी चीजों पर एक साथ महंगाई का दबाव बढ़ गया है। शुरुआत करते हैं चीनी से क्योंकि यहां Sugar Price Rise की रफ्तार सबसे ज्यादा चौंका रही है। सिर्फ एक हफ्ते में चीनी करीब ₹7 तक महंगी हुई है और अगर एक महीने का हिसाब लगाएं तो कीमत में करीब ₹17 किलो तक का उछाल आया है। यानी चीनी अब कई जगहों पर ₹70 किलो तक पहुंच चुकी है।

अब सवाल है कि इतनी तेजी क्यों? सरकार के मुताबिक इसकी एक बड़ी वजह है सप्लाई पर दबाव और जमाखोरी की आशंका। लेकिन कहानी यहां पर खत्म नहीं होती। त्योहारों का सीजन सामने है। आने वाले दिनों में मिठाई, बेकरी और दूसरी चीजों में चीनी की मांग बढ़ेगी। मतलब मांग बढ़ेगी और अगर उस हिसाब से सप्लाई नहीं बढ़ी तो कीमत पर फिर से दबाव आ सकता है।

इसी खतरे को देखते हुए सरकार ने 10 लाख टन ड्यूटी फ्री चीनी आयात की मंजूरी दी है। साथ ही कारोबारियों के लिए स्टॉक लिमिट लगाई गई है और चीनी मिलों को 15 अक्टूबर से पेराई शुरू करने को कहा गया है। सरकार की कोशिश साफ है। त्योहारों से पहले बाजार में चीनी की कमी नहीं होने देनी है।

लेकिन सिर्फ चीनी ही परेशान नहीं कर रही। प्याज भी अब रसोई का बजट बिगाड़ने लगा है। 21 अगस्त को प्याज का औसत खुदरा भाव करीब ₹40.79 किलो था। एक हफ्ते पहले यही कीमत ₹36.56 थी और 1 महीने पहले करीब ₹34.87। यानी एक महीने में प्याज करीब ₹6 किलो महंगा हो चुका है और इसकी वजह भी ऐसी है जो आने वाले दिनों की चिंता बढ़ाती है।

खरीफ प्याज की नई फसल बाजार में देर से पहुंच रही है। दक्षिण भारत से आवक में देरी है। महाराष्ट्र के नासिक इलाके में भी मानसून की वजह से बुवाई प्रभावित हुई है। अब अगर नई फसल की आवक में और देर हुई तो प्याज के दाम और ऊपर जा सकते हैं। सरकार बफर स्टॉक से प्याज बाजार में उतारने की तैयारी कर रही है। लेकिन असली राहत नई फसल की सप्लाई सामान्य होने पर ही मिलेगी।

अब उस चीज की बात जिसके बिना भारतीय थाली अधूरी है। दाल, अरहर, मूंग, उड़द और चना इनकी कीमतें भी पिछले एक महीने में ₹1 से ₹2 किलो तक बढ़ी हैं। अब यह बढ़ोतरी बहुत बड़ी नहीं लगती, लेकिन असली चिंता आगे की है।

इस साल दलहन की बुवाई का रकबा पिछले साल से करीब 35,000 हेक्टेयर कम है। और सिर्फ इतना ही नहीं, अरहर की बुवाई करीब 1.69 लाख हेक्टेयर कम बताई जा रही है। अब अगर मानसून कमजोर रहा और फसल पर असर पड़ा तो बाजार में सप्लाई घट सकती है और जब सप्लाई कम होती है तो कीमत बढ़ने में ज्यादा वक्त नहीं लगता। यानी दाल में आज जो हल्की तेजी दिख रही है, वो आगे चलकर बड़ी तेजी में बदल सकती है।

और अब बात खाने के तेल की। यहां मामला थोड़ा अलग है क्योंकि भारत की रसोई पर असर सिर्फ घरेलू फसल का नहीं, पूरी दुनिया के तेल बाजार का भी पड़ता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में पाम ऑयल की कीमतें करीब 20 महीने के हाई पर पहुंच चुकी हैं। इंडोनेशिया में मौसम और सूखे की स्थिति ने भी सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ाई है। वहीं रूस-यूक्रेन युद्ध की वजह से सूरजमुखी तेल की सप्लाई पर भी असर पड़ा है।

नतीजा यह है कि पिछले 1 महीने में भारत में खाने के तेल की कीमतें करीब 2 से 3% बढ़ चुकी हैं। और अगर ग्लोबल मार्केट में तेजी बनी रहती है तो इसका असर आने वाले दिनों में भारतीय किचन पर भी दिखाई दे सकता है।

तो अब चारों चीजों को एक साथ रखिए। चीनी की मांग त्योहारों में बढ़ने वाली है। प्याज की नई फसल की आवक में देरी है। दाल में बुवाई कम है और मौसम का जोखिम है। तेल अंतरराष्ट्रीय बाजार में महंगा हो रहा है।

यानी चारों तरफ से एक ही सवाल उठ रहा है। क्या रसोई की महंगाई अभी और बढ़ने वाली है?

सरकार जरूर कदम उठा रही है। चीनी का आयात बढ़ाया जा रहा है। जमाखोरी रोकने की कोशिश हो रही है। बफर स्टॉक से प्याज बाजार में लाया जा रहा है। लेकिन इन कदमों का असर कितना जल्दी दिखाई देता है, यह अहम होगा क्योंकि आने वाले हफ्तों में त्योहारों की मांग बढ़ेगी। मौसम का असर फसलों पर दिखाई देगा और ग्लोबल कमोडिटी मार्केट भी दिशा तय करेगा।

इसलिए फिलहाल सबसे बड़ी चिंता यह नहीं है कि आज रसोई कितनी महंगी है, बल्कि सवाल यह है कि अगले महीने यही रसोई कितनी और महंगी होगी। अगर चीनी, प्याज, दाल और तेल चारों की कीमतें एक साथ ऊपर गईं तो इसका सीधा असर आपके पूरे महीने के बजट पर पड़ सकता है।

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