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UPI Payment पर MDR की तैयारी, ₹2000 से ज्यादा के Digital Payment पर क्या बदलेगा?

अगर आप रोज UPI से Payment करते हैं तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है, क्योंकि जिस UPI को अब तक लगभग मुफ्त Payment System माना जाता रहा है, उस पर MDR यानी Merchant Discount Rate वापस आने की तैयारी है।

Financial Express की एक रिपोर्ट के मुताबिक ₹2000 और उससे ज्यादा के UPI Transactions पर 0.3% तक MDR लगाने का ऐलान अगले 10 से 12 दिनों में हो सकता है। इससे पहले Department of Financial Services एक Gazette Notification जारी कर सकता है, जिसमें यह साफ होगा कि किन Electronic Payment Modes को Charges से Statutory Protection मिलती रहेगी।

इसके बाद NPCI की अगुवाई वाली UPI and Service Sharing Committee MDR की दर, इसका दायरा और पूरा Structure तय कर सकती है।

लेकिन खबर सामने आते ही सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या आप ₹2000 से ज्यादा का UPI Payment करने पर आपके खाते से भी पैसा कटेगा?

सबसे पहले यह समझ लीजिए कि ऐसा नहीं है कि आप किसी दोस्त को ₹5000 भेजेंगे और आपके खाते से 0.3% यानी ₹15 कट जाएंगे। प्रस्तावित MDR मुख्य तौर पर Person to Merchant यानी P2M Transactions पर लागू होने की बात है।

मतलब जब आप किसी दुकान, कंपनी या Merchant को UPI से बड़ा Payment करते हैं। सरकार ने साफ किया है कि Customers और छोटे कारोबारियों पर इसका सीधा बोझ नहीं डाला जाएगा।

लेकिन यहां कहानी का सबसे दिलचस्प हिस्सा शुरू होता है। अगर ₹2000 से ऊपर के Merchant Payment पर 0.3% MDR लगता है तो सवाल है कि यह पैसा आखिर जाएगा किसकी जेब में?

MDR का पैसा किसी एक कंपनी को नहीं मिलेगा। UPI Payment के पीछे कई Layers में अलग-अलग Players काम करते हैं। इसलिए MDR से मिलने वाली रकम Payment Ecosystem के अलग-अलग हिस्सों में बंटेगी।

इसमें शामिल हो सकते हैं Issuing Bank यानी Customer का Bank, Acquiring Bank यानी Merchant की तरफ का Bank, Payment Service Providers यानी PSPs, PhonePe, Google Pay और Paytm जैसी Fintech Companies, जो App, QR Code और Merchant Onboarding जैसी Services देती हैं। इसके अलावा NPCI, जो UPI का Payment Network Operate और Settle करता है, वह भी इस Ecosystem का अहम हिस्सा है।

P2M Transactions में MDR का एक अहम हिस्सा Acquiring Bank को Interchange के तौर पर मिल सकता है। वहीं NPCI को UPI Network के संचालन के लिए एक छोटा Network Fee का हिस्सा मिल सकता है। यानी 0.3% की पूरी रकम किसी एक Player की कमाई नहीं होगी। Payment Chain में जिसने जो भूमिका निभाई है, उसके हिसाब से Revenue का हिस्सा तय होगा।

पर सवाल यह है कि जब UPI इतने सालों से बिना MDR के चल रहा था तो इसकी जरूरत अचानक क्यों पड़ रही है?

इसके पीछे सबसे बड़ी वजह है UPI का बढ़ता हुआ Scale और इसे चलाने की Cost। 2019 में सरकार ने UPI पर MDR खत्म कर दिया था। मकसद था कि लोग तेजी से Digital Payments अपनाएं और Cash पर निर्भरता कम हो। लेकिन आज UPI जिस स्तर पर पहुंच चुका है, उसके साथ Payment Infrastructure, Cyber Security, Fraud Prevention और Network Maintenance की Cost भी बढ़ रही है। Parliamentary Standing Committee on Finance के मुताबिक Digital Payments Industry की अनुमानित सालाना Operating Cost करीब ₹700 करोड़ है। इसके मुकाबले सरकार ने UPI को बढ़ावा देने और Zero MDR की वजह से Industry को Compensate करने के लिए करीब ₹2000 करोड़ का Allocation किया है।

यानी Industry की Cost और सरकार से मिलने वाले Compensation के बीच एक काफी बड़ा Gap है। अब MDR का असर उन जगहों पर ज्यादा दिख सकता है जहां UPI से बड़े Payments होते हैं। मसलन Electronics और महंगे Gadgets, बड़े Retail Purchases, महंगे कपड़े और Lifestyle Products। कुछ Financial और Securities Related Payments में भी इसका असर दिख सकता है। यहां Transaction Value ज्यादा होने की वजह से MDR की रकम भी ज्यादा होगी। हालांकि असली सवाल यह रहेगा कि Merchant इस अतिरिक्त Cost को खुद उठाता है या किसी दूसरे तरीके से इसकी भरपाई करने की कोशिश करता है।

FY26 में भारत में करीब 24,000 करोड़ UPI Transactions हुए और इनकी कुल Value करीब ₹314 लाख करोड़ रही। यानी UPI अब सिर्फ Payment करने का एक आसान तरीका नहीं रह गया है, बल्कि भारत की Digital Economy का Backbone बन चुका है। और इसलिए सरकार के सामने दो बड़ी चुनौतियां हैं। पहली, UPI आम आदमी के लिए सस्ता और आसान बना रहे और दूसरी, UPI को चलाने वाले Banks, Fintechs और Payment Infrastructure के लिए इसका Business Model टिकाऊ हो।

MDR इसी Balance को बनाने की कोशिश है।

यानी फिलहाल बात यह नहीं है कि हर UPI Payment पर आपसे पैसा लिया जाएगा। बल्कि कोशिश यह है कि बड़े Merchant Transactions से Payment Ecosystem को Revenue मिले, ताकि इतने बड़े Digital Network को चलाने की Cost पूरी की जा सके। अब असली नजर इस बात पर होगी कि 0.3% MDR का Final Structure क्या होता है, पैसा किसे कितना मिलता है और इसका बोझ आखिर Merchant तक सीमित रहता है या किसी और रूप में Consumer तक पहुंचता है।

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