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Anti Paper Leak Law Update 2026: सरकार एंटी पेपर लीक कानून में करेगी बड़े बदलाव, जानिए क्या होंगे नए नियम

भारत में पेपर लीक को रोकने के लिए भारत सरकार की तरफ से बहुत सारे सख्त कदम उठाए गए हैं। जिनकी जानकारी हाल ही में प्रधानमंत्री ने अपनी नई वीडियोस के माध्यम से दिया था। प्रधानमंत्री की तरफ से यह भी बताया गया कि भारत सरकार भारत में पेपर लीक को रोकने के लिए और सख्त नियम लेकर के आ रही है। पेपर लीक के मामले में जो दंड के प्रावधान हैं उनको सरकार और ज्यादा सख्त करने वाली है। जिसको लेकर के 2024 का जो एंटी पेपर लीक नियम है, एंटी पेपर लीक कानून जो है उसमें सरकार संशोधन करेगी। तो अब ये संशोधन क्या होंगे? क्या बदलाव यहां पर आपको देखने को मिलेंगे?

Anti Paper Leak Bill 2026: सरकार क्यों लाई नया संशोधन?

सबसे पहला सवाल आपके मन में आना चाहिए कि अगर 2024 में सरकार एक नया कानून लेकर के आई थी भारत में पेपर लीक को रोकने के लिए तो आखिर ऐसी क्या जरूरत पड़ गई है कि सरकार को दोबारा से 2 साल के भीतर अपने ही कानून में संशोधन करना पड़ रहा है? ऐसी क्या जरूरतें सरकार को महसूस हुई हैं?

तो इसमें अगर आप देखें भारत में बहुत सारे घटनाक्रम हुए हैं जिन घटनाक्रमों की वजह से इस नए संशोधन की मांग यहां पर की जा रही है

जिसमें से सबसे पहला और सबसे महत्वपूर्ण जो है वो मेरे महीने में हुआ नीट यूजी का पेपर लीक है। पेपर लीक होने के बाद देश भर में आपको हंगामा देखने को मिला। नीट के पेपर लीक होने की वजह से बहुत सारे जो आपके छात्र थे उन्होंने जो है सुसाइड जैसा बड़ा कदम उठा लिया। जिसके बाद देश भर में आपको आक्रोश देखने को मिला। आंदोलन हुए और आंदोलनों के बाद एक नया नई चेतना जो है वो भारतीय लोगों में आपको देखने को मिली है। भारत की शिक्षा के प्रति, भारत की शिक्षा व्यवस्था के प्रति, भारत में सुधारों के प्रति एक नई चेतना लोगों के बीच में आपको देखने को मिली है। और उसी वजह से इन्हीं तमाम चीजों का परिणाम है कि अब सरकार को भी लोगों के सामने, सरकार को भी युवाओं के सामने झुकना पड़ा है और सरकार को भी अपने कानून में, अपने ही नियम में जो सरकार दो साल पहले ही लेकर के आई थी, उसी नियम में सरकार को संशोधन करना पड़ रहा है। बिल का मकसद है 2024 में बने पिछले बिल को और मजबूत बनाना।

Anti Paper Leak Bill 2026 में क्या-क्या बड़े बदलाव होंगे?

Anti Paper Leak Bill को लोकसभा में केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने पेश किया है। जिसके तहत पेपर लीक करने वालों के खिलाफ जेल के साथ ही भारी जुर्माने का भी प्रावधान किया गया है। प्रस्तावित कानून के तहत सजा और जुर्माने में भारी बढ़ोतरी की गई है। नया बिल सार्वजनिक परीक्षा संशोधन विधेयक 2026 के नाम से है। जिसमें तेज सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन का प्रावधान है। पेपर लीक में दोषी पाए जाने पर अब सजा को 3 से 5 साल से बढ़ाकर 5 से 10 साल तक के लिए किया जाएगा। जबकि ₹1 लाख जुर्माना बढ़ाकर ₹1 करोड़ तक किया जाएगा। इसका उद्देश्य परीक्षा में गड़बड़ियों के खिलाफ कड़े कदम उठाने को लेकर रहेगा। लोकसभा में बिल पेश कर इसकी शुरुआत हो चुकी है। बिल के तहत 2 महीने में जांच पूरी करनी ही होगी। हर राज्य में फास्ट ट्रैक कोर्ट बनेंगे। जहां गड़बड़ी की रोजाना सुनवाई होगी। चार्जशीट दाखिल करने के बाद 3 महीने में ट्रायल पूरा करना होगा। सरकार इस बिल को पास करवाकर बड़ा संदेश देना चाहती है। तो वहीं विपक्ष तीखे सवालों के साथ सरकार को सदन में घेरने की रणनीति पर जुटा हुआ है।

Expert Task Force में कौन-कौन शामिल?

इस टास्क फोर्स में कई क्षेत्रों के दिग्गज और डोमेन विशेषज्ञों को शामिल किया गया है। Infosys के कोफाउंडर नंदन नीलेकणी को अध्यक्ष जबकि इनके अलावा इसरो के पूर्व अध्यक्ष डॉक्टर एस सोमनाथ पूर्व आईबी डायरेक्टर तपनका आईआईटी मद्रास के डायरेक्टर वी कामकोटी शिक्षा मंत्रालय की पूर्व सचिव अनीता करवाल लॉजिस्टिक्स एक्सपर्ट अमृत लाल मीणा को शामिल किया गया है।

केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में पेश किया Anti Paper Leak Bill
छवि 1: केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में पेश किया Anti Paper Leak Bill

वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नीट पेपर लीक के बाद परीक्षा सुधारों के लिए बड़ा फैसला किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बार फिर Instagram पर आए। परीक्षा सुधारों को लेकर एक बड़ा ऐलान किया।

सरकार का कहना है कि पिछले कुछ समय में सामने आए पेपर लीक, एग्जाम फ्रॉड और ऑर्गेनाइज्ड चीटिंग नेटवर्क के मामलों ने देश की पब्लिक एग्जामिनेशन सिस्टम की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए हैं। इसलिए अब सिर्फ दोषियों पर कारवाई नहीं बल्कि कानून को और सख्त बनाने की जरूरत है। प्रस्तावित अमेंडमेंट बिल में एग्जाम फ्रॉड के लिए ज्यादा सख्त सजा, गड़बड़ियों में शामिल सर्विस प्रोवाइडर्स पर कड़ी कारवाई और पेपर लीक मामलों की इन्वेस्टिगेशन और ट्रायल को तय समय के अंदर पूरा करने जैसे कई बड़े बदलाव प्रस्तावित किए गए हैं।

हालांकि बिल पेश होने के कुछ ही देर बाद लोकसभा की कार्रवाई हंगामे की वजह से दोपहर 2:00 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई थी। विपक्ष ने 20 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी के नेतृत्व में संसद मार्च के दौरान छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाही को लेकर सरकार से जवाब मांगा और इसी मुद्दे पर सदन में विरोध प्रदर्शन भी हुआ। दरअसल ये अमेंडमेंट बिल ऐसे समय में लाया गया जब पिछले एक महीने से नीट यूजी पेपर लीक और दूसरी परीक्षा संबंधी गड़बड़ियों को लेकर देश भर में लगातार विरोध प्रदर्शन हुए।

Organized Paper Leak Gang पर सबसे बड़ी कार्रवाई

अब बात करते हैं कि इस बिल में आखिर बदला क्या है? सरकार ने इस बिल में सबसे पहले सजा और जुर्माने को और सख्त करने का प्रस्ताव रखा है। अभी पब्लिक एग्जामिनेशन प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मींस एक्ट 2024 के तहत अगर कोई व्यक्ति पेपर लीक क्वेश्चन पेपर हासिल करने, बेचने, खरीदने, हल करवाने या दूसरी तरह की परीक्षा संबंधित धोखाधड़ी में दोषी पाया जाता है तो उसे कम से कम 3 साल और अधिकतम 5 साल तक की जेल हो सकती है। इसके साथ अधिकतम ₹1 लाख तक का जुर्माना भी लगाया जा सकता है। लेकिन नए अमेंडमेंट बिल में इन सजाओं को और बढ़ाने का प्रस्ताव है। अगर यह बिल पास हो जाता है तो ऐसे मामलों में कम से कम 5 साल और मैक्सिमम 10 साल तक की जेल हो सकती है। वहीं मैक्सिमम जुर्माना ₹1 लाख से बढ़ाकर ₹50 लाख कर दिया जाएगा। यानी सरकार का मानना है कि पेपर लीक जैसे अपराधों को रोकने के लिए सिर्फ गिरफ्तारी काफी नहीं है बल्कि ऐसी सजा होनी चाहिए जो दूसरों के लिए भी एक स्ट्रांग डिटरेंट यानी एक कड़ा संदेश बने। सरकार का कहना है कि पेपर लीक सिर्फ कुछ लोगों का काम नहीं होता। अक्सर इसके पीछे प्रिंटिंग एजेंसीज, टेक्नोलॉजी कंपनीज़, लॉजिस्टिक प्रोवाइडर्स, डाटा मैनेजमेंट फर्म्स और परीक्षा आयोजित करने वाली दूसरी प्राइवेट एजेंसीज की भी भूमिका होती है। यही वजह है कि इस बिल में सिर्फ आरोपियों पर ही नहीं बल्कि इन सर्विस प्रोवाइडर्स पर भी कारवाई और सख्त करने का प्रस्ताव रखा गया।

अब अगर कोई सर्विस प्रोवाइडर्स परीक्षा में गड़बड़ी का दोषी पाया जाता है तो उस पर मैक्सिमम ₹1 करोड़ का जुर्माना लगाया जा सकता है। लेकिन नए बिल में से बढ़ाकर ₹5 करोड़ करने का प्रस्ताव है। इसके अलावा ऐसी एजेंसीज को सरकारी परीक्षाओं से 4 साल के लिए बाहर किया जा सकता है। अब इस ड्यूरेशन को भी बढ़ाकर 8 साल करने का प्रस्ताव रखा गया। यानी अगर कोई कंपनी पेपर लीक के एग्जाम फ्रॉड में शामिल पाई जाती है तो उसे लंबे समय तक किसी भी पब्लिक एग्जामिनेशन से जुड़ा काम नहीं मिलेगा। बिल का एक और अहम प्रावधान है।

सरकार का कहना है कि कई बार पेपर लीक के एग्जाम फ्रॉड में किसी कंपनी का नाम तो सामने आता है लेकिन उसके पीछे फैसले लेने वाले लोगों की जिम्मेदारी तय करना आसान नहीं होता। इसी को ध्यान में रखते हुए अमेंडमेंट बिल में कंपनी के डायरेक्टर्स, सीनियर मैनेजमेंट और उन अधिकारियों के खिलाफ भी सख्त कारवाही का प्रस्ताव रखा गया है जो इस तरह की गड़बड़ियों में शामिल पाए जाते हैं या जिनकी मिलीभगत जांच में सामने आती है। अभी ऐसे मामलों में कम से कम 3 साल की जेल और ₹1 करोड़ तक के जुर्माने का प्रावधान है। लेकिन नए बिल में इसे बढ़ाकर कम से कम 5 साल की जेल और ₹5 करोड़ तक के जुर्माने का प्रस्ताव रखा गया है। यानी अगर जांच में साबित होता है कि किसी कंपनी के बड़े अधिकारी या मैनेजमेंट ने जानबूझकर पेपर लीक के एग्जाम फ्रॉड में भूमिका निभाई है तो कारवाई सिर्फ कंपनी तक सीमित नहीं रहेगी बल्कि जिम्मेदार लोगों पर भी सीधे केस चलेगा। इसके बाद बिल का फोकस है ऑर्गेनाइज्ड चीटिंग नेटवर्क्स पर। सरकार का कहना है कि आज पेपर लीक किसी एक व्यक्ति का अपराध नहीं रह गया। इसके पीछे कई बार ऐसे नेटवर्क काम करते हैं जिनमें बिचोलिए कोचिंग से जुड़े लोग, तकनीकी विशेषज्ञ, निजी कंपनियां और कई दूसरे लोग मिलकर पूरी साजिश को अंजाम देते हैं। इसी वजह से बिल में ऑर्गेनाइज एग्जामिनेशन क्राइम के लिए भी सजा और जुर्माने का और सख्त करने का प्रस्ताव रखा गया।

Anti Paper Leak Bill 2026
छवि 2: Anti Paper Leak Bill 2026

अगर किसी व्यक्ति, संस्था, एग्जामिनेशन अथॉरिटी या किसी सर्विस प्रोवाइडर की संगठित तरीके से मिलीभगत साबित होती है तो कम से कम 7 साल की जेल हो सकती है। पहले ऐसे मामलों में कम से कम 5 साल की सजा का प्रावधान था। वहीं न्यूनतम जुर्माना भी ₹1 करोड़ से बढ़ाकर ₹1 करोड़ करने का प्रस्ताव है। यानी सरकार अब बड़े स्तर पर चलने वाले पेपर लीक, रैकेट्स और संगठित गिरोहों के खिलाफ कहीं ज्यादा कड़ी कानूनी कारवाई करना चाहती है। लेकिन इस अमेंडमेंट बिल में बदलाव सिर्फ सजा और जुर्माने तक सीमित नहीं है। सरकार का यह भी मानना है कि पेपर लीक के मामलों में सबसे बड़ी समस्या सिर्फ अपराध नहीं बल्कि जांच और ट्रायल में होने वाली देरी भी है। कई बार जांच पूरी होने में महीनों या सालों लग जाते हैं। जिससे दोषियों पर कारवाई भी लंबी खींच जाती है। इसी वजह से बिल में पहली बार टाइम बाउंड इन्वेस्टिगेशन का प्रस्ताव रखा गया। अगर यह बिल कानून बन जाता है तो पेपर लीक से जुड़े मामलों की जांच पुलिस किसी सेंट्रल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी या केंद्र सरकार द्वारा गठित स्पेशल टास्क फोर्स को 2 महीने के भीतर पूरी करनी होगी।

यानी जांच के लिए एक तय समय सीमा होगी ताकि मामला अननेसेसरीली लंबा ना खींचे। इसके साथ ही केंद्र सरकार को यह अधिकार भी मिलेगा कि जरूरत पड़ने पर वह ऐसे मामलों की जांच के लिए एसटीएफ यानी स्पेशल टास्क फोर्स गठित कर सके। जांच के बाद अगला चरणआता है ट्रायल का। इसके लिए भी बिल में अलग व्यवस्था का प्रस्ताव रखा गया है। बिल के मुताबिक हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश को अपने-अपने हाई कोर्ट से सलाह

लेकर स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट्स नामित करनी होगी। इन अदालतों में सिर्फ इसी कानून के तहत दर्ज मामलों की सुनवाई होगी। इन कोर्ट्स में रोजाना सुनवाई होगी और कोशिश होगी कि चार्जशीट दाखिल होने के 3 महीने के भीतर फैसला आ जाए। सिर्फ नए मामले ही नहीं बल्कि इस कानून के तहत पहले से लंबित मामलों को भी इन स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट्स में ट्रांसफर किया जा सकेगा। अगर किसी पक्ष को स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट के फैसले पर आपत्ति होती है

तो उसके लिए भी अलग व्यवस्था प्रस्तावित की गई है। ऐसे मामलों की अपील सीधे हाई कोर्ट की दो जजों वाली बेंच के सामने होगी और कोशिश की जाएगी कि 3 महीने के अंदर उसका भी निपटारा कर दिया जाए। यानी सरकार इस कानून के जरिए सिर्फ सजा बढ़ाना नहीं चाहती बल्कि इन्वेस्टिगेशन, ट्रायल और अपील तीनों प्रक्रियाओं को तय समय के भीतर पूरा करने की व्यवस्था भी करना चाहती है। अब सवाल यह है कि आखिर 2024 में कानून बनने के सिर्फ 2 साल बाद ही उसे और सख्त करने की जरूरत क्यों पड़ गई? दरअसल पिछले कई सालों में देश भर में भर्ती परीक्षाओं और एंट्रेंस एग्जाम में पेपर लीक के कई बड़े मामले सामने आए। राजस्थान में शिक्षक भर्ती और एसआई भर्ती परीक्षा, उत्तर प्रदेश में पुलिस भर्ती परीक्षा, बिहार में शिक्षक भर्ती परीक्षा और दूसरी प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और संगठित नकल के आरोप लगे। इन घटनाओं की वजह से कई परीक्षाएं रद्द करनी पड़ी। री एग्जाम्स हुए और लाखों छात्र प्रभावित हुए। 2024 में नीट यूजी में पेपर लीक और दूसरी अनियमितताओं के आरोप लगे।

मामला इतना बढ़ा कि इसकी जांच सीबीआई को सौंपनी पड़ी। कई राज्यों में गिरफ्तारियां हुई और जांच में संगठित नेटवर्क के सामने आने का दावा किया गया। इसके कुछ ही दिनों बाद यूजीसी नेट 204 भी विवादों में आ गया। परीक्षा होने के अगले ही दिन शिक्षा मंत्रालय ने इसे रद्द कर दिया। सरकार ने कहा कि परीक्षा की इंटीग्रिटी से समझौता होने की आशंका के चलते यह फैसला लिया गया और जांच सीबीआई को सौंप दी गई। इन घटनाओं के बाद केंद्र सरकार ने पब्लिक एग्जामिनेशन प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मींस एक्ट 2024 लागू किया ताकि पेपर लीक और ऑर्गेनाइज्ड चीटिंग नेटवर्क्स पर कानूनी शिकंजा कसा जा सके। लेकिन इसके बावजूद पेपर लीक के मामले नहीं रुके। 2026 में नीट यूजी एग्जाम लीक का मामला फिर चर्चाओं में आया और उससे जुड़े विवादों के बाद छात्र सड़कों पर उतर आए। दिल्ली के जंतरमंतर से शुरू हुआ आंदोलन धीरे-धीरे देश के कई राज्यों तक पहुंच गया।

क्या सिर्फ कानून सख्त होने से Paper Leak रुकेगा?

छात्रों की मांग सिर्फ पेपर लीक की जांच तक सीमित नहीं थी। वो चाहते थे कि पूरे एग्जाम सिस्टम में जवाबदेही तय हो, दोषियों को सजा मिले और फ्यूचर में ऐसी घटनाएं दोबारा ना हो। यानी पेपर लीक का मुद्दा अब सिर्फ परीक्षा का नहीं बल्कि पब्लिक ट्रस्ट का सवाल बन चुका था। छात्रों के लगातार विरोध प्रदर्शन के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने कहा था कि पेपर लीक जैसी घटनाएं लाखों मेहनती छात्रों के साथ अन्याय है और दोषियों के खिलाफ सख्त कारवाई की जाएगी। इसके बाद सरकार ने पेपर लीक मामलों के लिए स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट्स बनाने की घोषणा की ताकि जांच और ट्रायल में होने वाली देरी को कम किया जा सके और अब उसी सीक्वेंस में सरकार पब्लिक एग्जामिनेशन प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मींस अमेंडमेंट बिल 2026 लेकर आई है। फिलहाल पब्लिक एग्जामिनेशन प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मींस अमेंडमेंट बिल 2026 को लोकसभा में पेश किया गया है। अब इस पर संसद में चर्चा होगी और दोनों सदनों से पारित होने के बाद ही यह कानून का रूप ले सकेगा। हालांकि क्या सिर्फ कानून को और सख्त बना देने से पेपर लीक जैसी घटनाएं रुक जाएगी या इसके लिए परीक्षा प्रणाली में भी और बड़े सुधारों की जरूरत है?

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