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शिक्षा मंत्री बनते ही Pralhad Joshi का ताबड़तोड़ एक्शन!

नई दिल्ली: नीट-यूजी परीक्षा को लेकर हुए विवाद और छात्रों के लंबे विरोध प्रदर्शन के बाद केंद्र सरकार में बड़ा बदलाव देखने को मिला। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया, जिसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वरिष्ठ केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया। इस फैसले के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि आखिर इतनी अहम जिम्मेदारी के लिए प्रधानमंत्री मोदी ने प्रह्लाद जोशी पर ही भरोसा क्यों जताया? इसके पीछे कई राजनीतिक और प्रशासनिक कारण बताए जा रहे हैं। आइए जानते हैं वे चार प्रमुख वजहें जिनकी चर्चा सबसे ज्यादा हो रही है।

केंद्र सरकार में बड़ा प्रशासनिक बदलाव करते हुए धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद प्रहलाद जोशी ने शिक्षा मंत्रालय की कमान संभाल ली है। पदभार ग्रहण करने के बाद उन्होंने मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ पहली समीक्षा बैठक की और मौजूदा हालात की जानकारी ली।

जिम्मेदारी संभालने के बाद प्रहलाद जोशी ने कहा कि उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है और वह पूरी गंभीरता के साथ मंत्रालय के कामकाज को समझने और आवश्यक फैसले लेने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने बताया कि फिलहाल मंत्रालय की कार्यप्रणाली और लंबित मामलों की विस्तृत जानकारी जुटाई जा रही है ताकि जल्द आवश्यक निर्णय लिए जा सकें।

प्रह्लाद जोशी केंद्र सरकार के अनुभवी नेताओं में गिने जाते हैं। वह फिलहाल उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। इससे पहले भी उन्होंने कई महत्वपूर्ण मंत्रालयों में काम किया है। सरकार का मानना है कि जटिल परिस्थितियों में निर्णय लेने का उनका अनुभव शिक्षा मंत्रालय के लिए उपयोगी साबित हो सकता है।

प्रह्लाद जोशी वर्ष 2019 से 2024 तक केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री रहे हैं। इस दौरान उन्होंने संसद में सरकार और विपक्ष के बीच समन्वय बनाने, कठिन परिस्थितियों में सदन का संचालन सुचारु रखने और कई अहम विधेयकों को पारित कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

माना जा रहा है कि संसद के मौजूदा सत्र में शिक्षा और नीट विवाद जैसे संवेदनशील मुद्दों पर विपक्ष के तीखे सवालों का जवाब देने में उनका अनुभव सरकार के लिए अहम रहेगा।

नीट परीक्षा विवाद के बाद देशभर में छात्रों का आक्रोश देखने को मिला। ऐसे समय में सरकार को ऐसे नेता की जरूरत थी जो राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर संतुलन बनाए रख सके। प्रह्लाद जोशी को शांत स्वभाव और कठिन परिस्थितियों में संयमित फैसले लेने वाले नेता के रूप में देखा जाता है। यही वजह है कि सरकार ने उन्हें इस चुनौतीपूर्ण समय में शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के कई प्रावधानों पर अभी भी काम जारी है। उच्च शिक्षा में सुधार, कौशल आधारित शिक्षा, राज्यों और केंद्र के बीच बेहतर समन्वय तथा नई योजनाओं को लागू करने के लिए अनुभवी नेतृत्व की जरूरत मानी जा रही है।

सरकार का मानना है कि प्रह्लाद जोशी विभिन्न मंत्रालयों और राज्यों के साथ बेहतर तालमेल बनाकर इन सुधारों को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

जिम्मेदारी संभालते ही क्या बोले प्रह्लाद जोशी?

शिक्षा मंत्रालय का कार्यभार संभालने के बाद प्रह्लाद जोशी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने उन पर भरोसा जताकर एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है और वह पूरी निष्ठा, विनम्रता तथा ईमानदारी के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि मंत्रालय के कामकाज को विस्तार से समझने के बाद आवश्यक निर्णय लिए जाएंगे और शिक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने की दिशा में लगातार काम किया जाएगा।

शिक्षा मंत्री बनते ही Pralhad Joshi का ताबड़तोड़ एक्शन!
छवि 1: शिक्षा मंत्री बनते ही Pralhad Joshi का ताबड़तोड़ एक्शन!

धर्मेंद्र प्रधान के काम की भी की सराहना

प्रह्लाद जोशी ने अपने पहले बयान में पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के कार्यकाल की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू करने सहित शिक्षा क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण सुधार किए गए हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि उन योजनाओं को आगे बढ़ाते हुए शिक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा।


अयप्पा मंदिर में दर्शन के बाद मंत्रालय पहुंचे

अपने पहले दिन प्रहलाद जोशी सुबह सबसे पहले दिल्ली स्थित अयप्पा मंदिर पहुंचे, जहां उन्होंने पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद लिया। इसके बाद वे शिक्षा मंत्रालय पहुंचे और अधिकारियों के साथ बैठक कर विभागीय कार्यों की समीक्षा की। छात्रों के विरोध प्रदर्शन के बीच बढ़ते राजनीतिक दबाव के बाद शनिवार को धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके तुरंत बाद केंद्र सरकार ने प्रहलाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय की अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंप दी।

छात्रों के आंदोलन के बाद हुआ बदलाव

नीट-यूजी परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर देशभर में छात्रों ने प्रदर्शन किए थे। बढ़ते राजनीतिक और सामाजिक दबाव के बीच धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री को अपना इस्तीफा सौंप दिया। अपने इस्तीफे में उन्होंने कहा कि छात्रों के हित और देश के व्यापक हित को ध्यान में रखते हुए उन्होंने यह फैसला लिया है।

इसी बीच प्रदर्शन कर रहे छात्र संगठनों ने भी सरकार के साथ कई दौर की बातचीत के बाद अपना आंदोलन वापस लेने की घोषणा की। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सरकार ने उनकी प्रमुख मांगों पर सकारात्मक रुख दिखाया है और आगे भी तय समयसीमा में कार्रवाई का भरोसा दिया है।

छात्रों पर कार्रवाई को लेकर राहुल गांधी ने उठाए सवाल

सरकार में हुए इस बदलाव के बाद कांग्रेस ने इसे अपनी राजनीतिक जीत के रूप में पेश करने की कोशिश की। दिल्ली और लखनऊ समेत कई स्थानों पर राहुल गांधी के समर्थन में पोस्टर लगाए गए। युवा कांग्रेस का दावा है कि छात्रों के आंदोलन और राहुल गांधी द्वारा बनाए गए दबाव के कारण सरकार को शिक्षा मंत्री बदलना पड़ा।

हालांकि छात्रों का आंदोलन समाप्त हो चुका है, लेकिन इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस अभी भी जारी है। राहुल गांधी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर 20 जुलाई को छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर जवाब मांगा है।

अपने पत्र में राहुल गांधी ने लाठीचार्ज, छात्राओं के साथ कथित दुर्व्यवहार, सिविल ड्रेस में मौजूद लोगों की भूमिका और पैलेट गन के इस्तेमाल जैसे मुद्दों पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा कि यदि कार्रवाई का आदेश गृह मंत्रालय की ओर से नहीं दिया गया था, तो फिर इसकी अनुमति किस स्तर से मिली।

राहुल गांधी ने यह भी सवाल किया कि प्रदर्शन के दौरान सिविल ड्रेस में छात्रों के साथ मारपीट करने वाले लोग कौन थे और उन्हें वहां किसके निर्देश पर भेजा गया था। कांग्रेस ने संकेत दिए हैं कि संसद के आगामी सत्र में भी यह मुद्दा जोर-शोर से उठाया जाएगा।

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