जब पूरा का पूरा सिस्टम एक तरफ हो और उसे सुधारने के लिए अकेला एक अधिकारी मैदान में उतर जाए, तो क्या होता है? आज बात महाराष्ट्र के एक ऐसे ही आईएएस अधिकारी की करते हैं, जिसने अपनी ईमानदारी और नो-नॉनसेंस एटीट्यूड से न सिर्फ महाराष्ट्र बल्कि पूरे देश में चर्चा बटोरी है। उनका नाम है Tukaram Munde।
यूं तो उनके नाम सबसे ज्यादा तबादले होने का रिकॉर्ड दर्ज है, लेकिन आज भी भ्रष्टाचारियों और नियमों को ताक पर रखने वालों के लिए उनका नाम डर का दूसरा पर्याय बना हुआ है। आखिर कौन हैं यह दबंग अधिकारी और क्यों सिस्टम उनसे इतना घबराता है?
Tukaram Munde 2005 बैच के महाराष्ट्र कैडर के आईएएस अधिकारी हैं। वे बीड़ जिले के एक छोटे से गांव से आते हैं। अपनी कड़ी मेहनत के दम पर उन्होंने यूपीएससी परीक्षा पास की और आज उन्हें एक नो-नॉनसेंस अधिकारी के रूप में जाना जाता है।
सुबह 6 बजे कहीं भी अचानक छापेमारी के लिए पहुंच जाना और समय की सख्त पाबंदी उनकी पहचान है। अगर किसी बैठक का समय सुबह 9 बजे तय है, तो 9 बजकर 1 मिनट पर दरवाजा बंद हो जाता है। नियमों से किसी भी तरह का समझौता न करने की वजह से नेता और अधिकारी अक्सर उनकी शिकायत करते रहते हैं।
यही कारण है कि वे किसी भी पद पर दो से चार महीने से ज्यादा नहीं टिक पाते। हालांकि अपनी ईमानदारी और सख्त कार्यशैली के चलते वे मौजूदा देवेंद्र फडणवीस सरकार के सबसे भरोसेमंद अधिकारियों में भी गिने जाते हैं।
हाल ही में जब Tukaram Munde को महाराष्ट्र के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) का कमिश्नर बनाया गया, तब एक महत्वपूर्ण मामला सामने आया। बॉम्बे हाई कोर्ट ने उन्हें निर्देश दिया कि राज्य के सभी सरकारी अस्पतालों, स्कूलों, कार्यालयों और अन्य सरकारी संस्थानों की कैंटीनों की जांच की जाए, ताकि यह पता लगाया जा सके कि वहां लोगों को दिया जाने वाला भोजन सुरक्षित है या नहीं और कहीं उसमें मिलावट तो नहीं की जा रही।
हालांकि किसी ने भी यह नहीं सोचा था कि Tukaram Munde इस अभियान की शुरुआत कहां से करेंगे। उन्होंने किसी अस्पताल या सरकारी कार्यालय से नहीं, बल्कि सीधे बॉम्बे हाई कोर्ट की अपनी कैंटीन से जांच शुरू की।
बताया जाता है कि उन्होंने हाई कोर्ट की कैंटीन में छापेमारी की, जहां कई अनियमितताएं और खाद्य सुरक्षा संबंधी खामियां सामने आईं। इसके बाद उन्होंने विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर अगली सुनवाई में अदालत के सामने पेश कर दी। यह देखकर जज भी हैरान रह गए कि जिस अदालत ने उन्हें जांच का आदेश दिया था, उन्होंने सबसे पहला एक्शन उसी की कैंटीन पर लिया।
हाई कोर्ट की कैंटीन के बाद Tukaram Munde यहीं नहीं रुके। इसके बाद उन्होंने बीएमसी की कैंटीन पर भी कार्रवाई करवाई।
बच्चों की सेहत को ध्यान में रखते हुए स्कूलों के 50 मीटर के दायरे में कोल्ड ड्रिंक, सॉफ्ट ड्रिंक्स, चिप्स और चॉकलेट जैसी अस्वास्थ्यकर चीजों की बिक्री पर रोक लगा दी गई। गंदगी पाए जाने पर कई वीआईपी क्लबों और बड़े-बड़े होटलों के लाइसेंस भी निलंबित किए गए।
इसके अलावा नकली दूध, मिलावटी पनीर और खाद्य तेल माफियाओं के खिलाफ राज्यव्यापी अभियान चलाया गया और मिलावट करने वालों को सीधे गिरफ्तारी की चेतावनी दी गई।
हाई कोर्ट के आदेश को जिस निष्पक्षता और सख्ती के साथ Tukaram Munde ने लागू किया, उससे बड़े-बड़े खाद्य माफियाओं की नींद उड़ गई। कहा जाता है कि उनके ही विभाग के 29 अधिकारी उनके खिलाफ हो गए और लगातार शिकायतें होने लगीं। कई बार तबादलों के बावजूद Tukaram Munde आज भी पूरे देश में चर्चा का विषय बने हुए हैं।
हाल के दिनों में उनकी कई रील्स सोशल मीडिया, खासकर इंस्टाग्राम पर तेजी से वायरल हो रही हैं। इनमें दावा किया जाता है कि जब अदालत ने पूछा कि केवल निजी संस्थानों की ही जांच क्यों की जा रही है और सरकारी संस्थानों की भी जांच होनी चाहिए, तब Tukaram Munde ने सबसे पहले उसी बॉम्बे हाई कोर्ट की कैंटीन पर छापेमारी कर दी जिसने उन्हें यह आदेश दिया था। इस कार्रवाई ने सभी को हैरान कर दिया और इसके बाद उनका नाम एक बार फिर पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया।